बागपत

साइबर क्राइम फ्रॉड से बचें — सतर्क रहें, सुरक्षित रहें

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां मोबाइल और इंटरनेट ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने इसे कमाई का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। आज हालात यह हैं कि पढ़ा–लिखा व्यक्ति भी एक छोटी सी चूक के कारण अपनी जीवनभर की कमाई गंवा बैठता है।
साइबर ठगी अब सिर्फ कॉल या मैसेज तक सीमित नहीं रही, बल्कि
UPI, वीडियो कॉल, स्क्रीन शेयर, सोशल मीडिया और मनोवैज्ञानिक दबाव के ज़रिये लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
नया ट्रांजैक्शन फ्रॉड — छोटा अमाउंट, बड़ा नुकसान
हाल के दिनों में एक बेहद खतरनाक तरीका सामने आया है—
तरीका क्या है?
साइबर अपराधी आपके बैंक या UPI अकाउंट में ₹200–₹500 जैसे छोटे पैसे भेज देते हैं
आप जब Google Pay / PhonePe / Paytm खोलकर बैलेंस या ट्रांजैक्शन चेक करते हैं
उसी समय पहले से सक्रिय अपराधी
किसी लिंक
किसी कॉल
या किसी छुपे हुए रिमोट एक्सेस के ज़रिये
आपके मोबाइल पर नियंत्रण पा लेते हैं
फिर ₹5000–₹5000 करके पैसे निकालने लगते हैं
यह सिलसिला तब तक चलता है जब तक अकाउंट में ₹5000 से कम बैलेंस न रह जाए
 बचाव के उपाय
UPI ऐप खोलते ही एक बार जानबूझकर गलत PIN डालें
इससे किसी भी संदिग्ध ऑटो-एक्सेस को झटका लगता है
अनजान पैसे आएँ तो, न खर्च करें, न वापस भेजें, पहले बैंक या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें
 वीडियो कॉल से होने वाली खतरनाक ठगी
आजकल साइबर अपराधी वीडियो कॉल को हथियार बना चुके हैं। तरीका 1: फर्जी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल, कॉल करने वाला खुद को, बैंक अधिकारी, पुलिस, CBI, साइबर सेल, या कस्टमर केयर, बताता है। डराया जाता है:
“आपका अकाउंट संदिग्ध है”
“केस दर्ज हो रहा है”
स्क्रीन शेयर या ऐप डाउनलोड करवाया जाता है, कुछ ही सेकंड में अकाउंट खाली, तरीका 2: अश्लील वीडियो कॉल ब्लैकमेल, अचानक अनजान नंबर से वीडियो कॉल, अपराधी जानबूझकर अश्लील हरकत करता है, कॉल रिकॉर्ड कर ली जाती है, बाद में धमकी दी जाती है—
“वीडियो वायरल कर देंगे”
डर और शर्म के कारण लोग पैसे दे देते हैं
बचाव
अनजान वीडियो कॉल कभी रिसीव न करें, गलती से कॉल उठ जाए तो कैमरा तुरंत बंद करें, ब्लैकमेल पर पैसा देना अपराध को बढ़ावा देना है, सीधे शिकायत करें, स्क्रीन शेयर — सबसे खतरनाक जाल, अधिकतर लोग यही गलती करते हैं। अपराधी कहते हैं—
“रिफंड दिलवा देते हैं” “ट्रांजैक्शन फेल हो गया”
“बस स्क्रीन शेयर कर दीजिए”
 नतीजा
OTP दिखाई दे जाता है, UPI और बैंक कंट्रोल अपराधी के हाथ में, मिनटों में अकाउंट खाली
 बचाव
किसी भी हाल में स्क्रीन शेयर न करें, असली बैंक कर्मचारी कभी स्क्रीन शेयर नहीं मांगता, पुराने लेकिन आज भी सक्रिय फ्रॉड तरीके, KYC अपडेट फ्रॉड, QR कोड स्कैन फ्रॉड
> QR स्कैन करना = पैसा देना
फर्जी कस्टमर केयर नंबर
लॉटरी, इनाम, जॉब ऑफर फ्रॉड
सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर रिश्तेदारों से पैसे मंगवाना
डर, लालच और जल्दबाज़ी — साइबर ठगी के तीन सबसे बड़े हथियार
साइबर अपराधी तकनीक से पहले आपके मन पर वार करते हैं।
 डर
“अकाउंट बंद हो जाएगा”, “पुलिस केस दर्ज है”, “आज ही KYC करो”
 लालच
“लॉटरी लग गई”, “फ्री इनाम”, “डबल रिटर्न”
 जल्दबाज़ी
“5 मिनट में फैसला लो”, “अभी नहीं किया तो नुकसान”
 सुरक्षा मंत्र
> रुकिए – सोचिए – जांचिए – फिर निर्णय लीजिए, अगर साइबर फ्रॉड हो जाए तो तुरंत करें, 1930 — राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन, cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत, अपने बैंक को तुरंत सूचना दें, देरी = नुकसान बढ़ना
साइबर अपराधी आपकी एक गलती का इंतज़ार करता है।
आपकी एक सतर्कता किसी की ज़िंदगी भर की कमाई बचा सकती है।
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