गोड्डा
18 वर्षो तक भाजपा के नेताओं और उनके गठबंधन दलों ने पेशा कानून को गंभीरता से नहीं लिया : प्रेमनंदन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। झारखंड प्रदेश के आदिवासी एवं मूलवासी का चीर लंबित मांग पेशा एक्ट को कैबिनेट से मंजूरी दिलाकर एक ऐतिहासिक कार्य किया गया है। इस ऐतिहासिक कार्य कराने की खुशी में झारखंड मुक्ति मोर्चा जिला कमिटी द्वारा बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने होकर ढोल नगाड़े, गाजे बाजे के साथ शहर में जुलूस निकाला गया। जुलूस में खूब रंग, अबीर, गुलाल उड़ाया गया और मिठाइयां बांटी। लगातार कार्यकर्ताओं द्वारा पटाखे छोड़े जा रहे थे और आतिशबाजी की जा रही थी। कार्यकर्ता एवं आमलोग हेमन्त सोरेन जिंदाबाद, हेमन्त है तो कुछ भी संभव है, हेमन्त है तो हिम्मत है का काफी गर्मजोशी से गगनभेदी नारा लगा रहे थे। जुलूस में कार्यकर्ताओं की खुशी देखते बनता था। सभा को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष प्रो. प्रेम नन्दन कुमार ने कहा कि पेशा कानून राज्य में लागू हो यह इस प्रदेश के आदिवासी एवं मूलवासियो की चीर लंबित मांग रही है। जिसे इस प्रदेश के लोकप्रिय, जनप्रिय, नेता हेमन्त सोरेन ने इस कानून को कैबिनेट में पास कराकर पूरा करने का काम किया। यूं तो इस एक्ट को राज्य गठन के बाद ही प्रदेश में लागू किया जना चाहिए था, लेकिन इस प्रदेश में 18 वर्षो तक भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और उनके गठबंधन दलों के नेताओं ने मिलकर सरकार चलाया। बाबजूद इस कानून को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया।2019 में जब हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनी और हेमन्त सोरेन इस प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तभी से इस कानून को लागू करना चाहते थे, लेकिन पहले दो वर्षों तक कोरोना काल में कुछ काम नहीं हो सका। उससे उबरे तो लगातार भारतीय जनता पार्टी और NDA की केंद्र में बैठी हुई थी। सरकार द्वारा झूठे मुकदमों में कभी ED तो कभी CBI तो कभी IT डिपार्टमेंट द्वारा फसा कर और जेल भेज कर परेशान करने का काम करते रहे। जिसके कारण सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं ले सकी। जैसे ही हेमंत सोरेन के पार्ट 2 की सरकार बनी वैसे ही यहां के लोगो की जनभावना के अनुकूल पेशा कानून बनाने का कार्य किए। इसके लिए मुख्यमंत्री को हृदय से धन्यवाद दिया और आभार प्रकट किया। उन्होंने बताया कि इस कानून के बनने से अधिसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को पूर्ण अधिकार मिलेगा। ग्राम सभा अपने गांवों के विकास से संबंधित योजना स्वयं बनाने में सक्षम होगे। लघु खनिज, जल, जंगल, जमीन पर ग्राम सभा का अधिकार होगा। छोटे छोटे लड़ाई झगड़े के मुकदमों का फैसला करने का अधिकार ग्राम सभा के पास होगा। इस कानून आदिवासियों की संस्कृति, उनकी मनकी मुंडा, न्याय व्यवस्था आदि अक्षुण्ण रहेगा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला सचिव बासुदेव सोरेन, केंद्रीय समिति सदस्य पुष्पेंद्र टुडू, मेरी सोरेन, उपाध्यक्ष श्याम हेंब्रम, मृत्युजंय सिंह,मो. आरगमन, गुलज़ारी दास, महेंद्र उरांव, प्रखंड अध्यक्ष विनोद मुर्मू, अवध किशोर हांसदा, यूसुफ अंसारी, रामचन्द्र सोरेन, सुल्तान अहमद, नगर अध्यक्ष राजकुमार दास, ताला सोरेन, विजय कुमार महतों, जितेंद्र कुमार उर्फ मुन्ना भगत, शिवम् कुमार दुबे, सोम मरांडी, आलम अंसारी, संतोष महतो, शिव शंकर मंडल, जगदीश हेंब्रम, राजेश हांसदा, कुर्बान अंसारी, बालमुकुंद महतो, फिरदौस आलम, प्रकाश मंडल, आलम अंसारी, अरूण कुमार हांसदा, विजय हांसदा, पंकज सोरेन, जलालुद्दीन अंसारी, पवन कुमार यादव, राम प्रसाद राउत, सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।




