गाजियाबाद

लोनी में सफाई व्यवस्था चरमराई, जगह–जगह कूड़े के ढेर

जनप्रतिनिधियों ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यशैली पर  फिर उठाए गंभीर सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी (गाजियाबाद) :  नगर पालिका परिषद लोनी क्षेत्र में सड़कों, गलियों और खाली स्थलों पर पड़े कूड़े के ढेर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कई वार्डों में कचरा संग्रहण व्यवस्था कागज़ी दावों तक सीमित दिख रही है, जबकि वास्तविकता में सफाई की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नियमित कूड़ा उठान न होने से बदबू, गंदगी और संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।
रिहायशी कॉलोनियों से लेकर बाज़ारों और मुख्य सड़कों के किनारों तक जगह–जगह कूड़ा खुले में पड़ा देखा जा सकता है। लोगों का आरोप है कि पर्याप्त डस्टबिन नहीं हैं और समय पर कचरा न उठने की वजह से लोग मजबूरन सड़क किनारे कूड़ा डालते हैं, जिससे नालों का बहाव भी बाधित हो रहा है।
अंकुर बिहार में कर्मचारी तैनाती पर भी  उठी उंगली
भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष आरती मिश्रा ने कहा कि अंकुर बिहार क्षेत्र में सफाई कर्मचारियों की तैनाती अपर्याप्त है। यहाँ तैनात सफाई मेट संदीप शिकायत मिलने पर समाधान का आश्वासन तो देता है, लेकिन समस्याएँ ज्यों-की-त्यों बनी रहती हैं।
गौरतलब है कि इस क्षेत्र को विधायक नंदकिशोर गुर्जर द्वारा गोद लिए जाने के बावजूद सड़कों की बदहाल स्थिति और कचरे की समस्या लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है।
सभासद करेंगे घेराव, सफाई में धांधली का आरोप
वार्ड संख्या 41 के सभासद अंकुश जैन ‘मिकू’ ने चेतावनी दी है कि वे अपने समर्थकों के साथ नगर पालिका का घेराव करेंगे। उनका आरोप है कि सफाई व्यवस्था के नाम पर बड़े पैमाने पर लापरवाही और भ्रष्टाचार हो रहा है, जबकि अधिकारी कार्रवाई करने से बचते हैं।
अधिशासी अधिकारी पर जवाबदेही का दबाव
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब स्वयं भाजपा से जुड़े पदाधिकारी और सभासद ही सफाई व्यवस्था से असंतुष्ट हैं, तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनका कहना है कि वर्तमान हालात के लिए नगर पालिका प्रशासन और विशेष रूप से अधिशासी अधिकारी के.के. मिश्रा को जवाब देना चाहिए।
कागज़ों में सीमित स्वच्छ भारत मिशन
सभासद रामनिवास त्रिपाठी का कहना है कि योजनाएँ तो बनाई जाती हैं, पर क्रियान्वयन कमजोर है। नगरवासियों का भी मानना है कि जब तक कचरा निस्तारण प्रणाली मजबूत नहीं होती और निगरानी कड़ी नहीं की जाती, तब तक स्वच्छता के दावे व्यवहारिक रूप नहीं ले पाएँगे।

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