बागपत

किन्नर समाज में गहराया आपसी विवाद

चांदनी ने असगर पर लगाए गंभीर आरोप

,असगर को किन्नर मानने से किया इनकार, भाकियू महिला इकाई और किन्नर समाज के लोग पहुंचे समर्थन में
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत : क्षेत्र में किन्नर समाज के बीच आपसी कलह लगातार गहराती जा रही है। ताज़ा मामला किन्नर चांदनी और असगर के बीच विवाद को लेकर सामने आया है। चांदनी ने असगर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह स्वयं को किन्नर बताकर समाज और लोगों को भ्रमित कर रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि असगर किन्नर है ही नहीं। चांदनी के अनुसार असगर के चार पुत्र हैं और उसका भरा-पूरा पारिवारिक जीवन है, ऐसे में उसे किन्नर समाज का हिस्सा बताना अनुचित है।
चांदनी का कहना है कि असगर क्षेत्र में किन्नर समाज के पारंपरिक कार्यों में भी बाधा उत्पन्न कर रहा है और जबरन कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि असगर न सिर्फ समाज को बदनाम कर रहा है, बल्कि वास्तविक किन्नरों के हक और सम्मान को भी ठेस पहुंचा रहा है।
इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन की महिला इकाई और किन्नर समाज के कई लोग चांदनी के समर्थन में उपस्थित रहे। इनमें भाकियू की किन्नर समाज जिला अध्यक्ष चांदनी, भाकियू जिला सचिव सोनिया तोमर, किन्नर समाज की सदस्य काजल किन्नर, रीना किन्नर, राजवीर पांचाल, आशु शर्मा सहित अन्य लोग शामिल रहे। इन सभी ने चांदनी के आरोपों का समर्थन करते हुए प्रशासन से मांग की कि इस मामले की ठोस जांच कर असली-नकली की पहचान की जाए और समाज में भ्रम फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाए।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
चांदनी और उनके समर्थकों ने यह भी कहा कि यदि जल्द ही प्रशासन द्वारा इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं की गई और असगर जैसे फर्जी व्यक्तियों पर कानूनी कार्यवाही नहीं हुई, तो वे धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने मांग की कि किन्नर समाज की पहचान और गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे।
स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती
यह विवाद अब सिर्फ आपसी रंजिश नहीं रह गया है, बल्कि इससे जुड़े सामाजिक और प्रशासनिक आयाम भी सामने आ रहे हैं। किन्नर समाज के लोग इस बात से आहत हैं कि कुछ लोग झूठी पहचान का सहारा लेकर उनके समुदाय को बदनाम कर रहे हैं।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस प्रकरण को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा गर्म है और समाज के कई वर्गों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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