छिंदवाड़ा

गौरैया सब्जी मंडी में भ्रष्टाचार के आरोप, किसानों की जेब पर डाका

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

छिंदवाड़ा। जिले की प्रसिद्ध गौरैया सब्जी मंडी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मंडी व्यवस्था संभालने वाली प्रभारी इंस्पेक्टर देवकी कुशराम पर भ्रष्टाचार और धांधली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। किसानों और छोटे खरीदारों का कहना है कि उनसे निर्धारित शुल्क लिए बिना ही 300 से 1000 रुपये प्रति ऑटो या वाहन की कथित उगाही की जाती है, जबकि मंडी से निकलते समय उन्हें कोई रसीद भी उपलब्ध नहीं कराई जाती। वहीं आरोप यह भी है कि मंडी से जुड़े कुछ दलालों की गाड़ियों को बिना अनुमति सीधे पास करा दिया जाता है।

बड़ा दौरा, छोटा सच्चाई करण
हाल ही में मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के आंचलिक अधिकारी डी.एस. मो. खानदान ने छिंदवाड़ा गल्ला मंडी का औचक निरीक्षण किया। लेकिन सवाल यह है कि इतनी तैयारियों के बावजूद अधिकारी सीधे मंडी कार्यालय क्यों पहुंचे और वहां से कुछ स्टाफ को अपने साथ क्यों ले गए? स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, मंडी से ‘चुने हुए’ कर्मचारियों को बुलाकर खानापूर्ति जैसी रस्म निभाई गई।

सूत्रों का आरोप है कि मंडी निरीक्षण के दौरान देवकी कुशराम को पहले ही सूचित कर दिया गया, जिससे रिकॉर्ड में तत्काल हेरफेर कर ‘अस्थायी सफाई’ कर दी गई। किसानों में यह सवाल गूंज रहा है कि जब संभाग स्तर का बड़ा अधिकारी मंडी में मौजूद था, तब उसने पिछली अनियमितताओं पर नजर क्यों नहीं डाली।

किसानों की नाराज़गी : चौरई उपज मंडी को क्यों नज़रअंदाज़ किया गया?
किसानों के बीच सबसे बड़ा आक्रोश इस बात को लेकर है कि अधिकारी दौरे के क्रम में चौरई कृषि उपज मंडी से होकर गए, लेकिन पिछले छह महीने से जमीनी समस्याओं से जूझ रही चौरई मंडी में एक झलक डालना भी जरूरी नहीं समझा। वहां के लगभग 76 किसान लंबे समय से मंडी प्रबंधन की अनियमितताओं से परेशान हैं।

ग्रामीण किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि अधिकारी चौरई मंडी की उपेक्षा इसलिए कर गए क्योंकि पहले से ही ‘सेटअप तैयार’ था। वहीं संदेह यह भी जताया जा रहा है कि चौरई से कुछ सिलेक्टेड कर्मचारियों की गाड़ियाँ एक सोयाबीन प्लांट तक भेजी गईं, जहां कथित लेन-देन की चर्चा बाज़ार में गर्म है।

किसान पूछ रहे हैं सवाल
किसानों पर ‘नजराना’ लादने के बावजूद उन्हें कोई रसीद क्यों नहीं दी जाती?

मंडी के दलालों के वाहनों को बिना अनुमति पास क्यों किया जाता है?

संभागीय अधिकारी का औचक निरीक्षण पहले ही कैसे लीक हो गया?

चौरई मंडी की जमीनी समस्याओं को अनदेखा क्यों किया गया?

क्या मंडी व्यवस्था को बचाने की बजाय बड़े स्तर पर ‘प्रबंधन सेटअप’ चल रहा है?

जनहित में पारदर्शिता जरूरी
गौरैया सब्जी मंडी और चौरई मंडी से जुड़ा यह पूरा प्रकरण एक बार फिर मंडी व्यवस्था और उसके निगरानी तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते पारदर्शी जांच और कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो इसका खामियाजा प्रत्यक्ष रूप से धरतीपुत्र किसानों की जेब पर पड़ेगा।

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