
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
माधौगढ़ (जालौन)। बीहड़ क्षेत्र में स्थित रामपुरा का प्राचीन देवी मंदिर इन दिनों चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हर वर्ष की तरह इस बार भी रामपुरा ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह बेरा द्वारा यहां नौ दिवसीय भव्य धार्मिक आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन भजन संध्या और विशाल भंडारे का आयोजन हो रहा है।
इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां आते हैं और माता रानी के दरबार में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा अवश्य पूरी होती है, जिसके कारण मंदिर की प्रसिद्धि लगातार बढ़ती जा रही है। ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह बेरा स्वयं माता रानी के अनन्य भक्त हैं। उनकी अगुवाई में यह आयोजन न केवल भव्य रूप ले चुका है, बल्कि एक धार्मिक परंपरा के रूप में स्थापित हो गया है। वह पूरे नौ दिन अपने परिवार सहित मंदिर परिसर में रहकर सभी व्यवस्थाओं की निगरानी करते हैं और आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। भजन संध्या में देश के विभिन्न हिस्सों से प्रसिद्ध भजन गायकों को आमंत्रित किया जाता है। चैथे दिन बिहार के भागलपुर से आए सुप्रसिद्ध भजन गायक मनीष मानस ने जब जगदम्बे के भजन प्रस्तुत किए, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। वहीं बुंदेलखंड की प्रसिद्ध भजन गायिका काजल दीदी के भजनों पर भी भक्त झूमते नजर आए। इसके साथ ही ब्लॉक प्रमुख द्वारा प्रतिदिन दिन में विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। आयोजन की व्यवस्थाएं स्वयं ब्लॉक प्रमुख और उनके सहयोगी निरंतर देखते हैं, जिससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। अजीत सिंह बेरा के प्रयासों से मंदिर परिसर का व्यापक विकास भी हुआ है। बेहतर व्यवस्थाओं, सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के कारण यह मंदिर अब पूरे देश में अपनी पहचान बना रहा है। नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मंदिर की बढ़ती ख्याति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित जिले के कई जनप्रतिनिधि भी मत्था टेकने पहुंचते हैं और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। कुल मिलाकर, रामपुरा का यह देवी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता और भक्ति भावना का भी प्रतीक बन चुका है, जहां हर वर्ष चैत्र नवरात्रि पर भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।


