गाजियाबाद

विश्व का सबसे प्रदूषित शहर बना लोनी

जिम्मेदार कौन, कार्रवाई कब?

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी/गाजियाबाद : भारत को दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश और दिल्ली को सबसे प्रदूषित राजधानी बताने वाली IQAir की वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 के बीच गाजियाबाद के पास स्थित लोनी का नाम विश्व के सबसे प्रदूषित शहर के रूप में सामने आना स्थानीय लोगों के लिए चिंता और आक्रोश का विषय बन गया है। एक तरफ जहां यह खबर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र की जनता अपने ही हालात पर सवाल उठाती नजर आ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, लोनी में पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5) का स्तर बेहद खतरनाक श्रेणी में पहुंच चुका है, जो सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, त्वचा रोग और बच्चों व बुजुर्गों में बढ़ती बीमारियां अब आम होती जा रही हैं।
प्रदूषण के मुख्य कारण
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध फैक्ट्रियां और प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयां संचालित हो रही हैं। ये इकाइयां बिना किसी मानक के धुआं और जहरीले रसायन वातावरण में छोड़ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती के दावों के बावजूद इन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
लोगों का कहना है कि अवैध धन के चलते संबंधित विभाग केवल कागजों में कार्रवाई दिखाते हैं, जबकि जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। “शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती,” यह कहना है कई स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का, जिन्होंने थाने से लेकर NGT और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक गुहार लगाई, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
सामाजिक संगठनों की नाराजगी
कई सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठाई, धरना-प्रदर्शन किए और शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण वे भी निराश होकर पीछे हटने को मजबूर हो गए। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
राजनीतिक चुप्पी पर सवाल
लोनी के विधायक नंदकिशोर गुर्जर की चुप्पी पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी घटनाओं पर सक्रिय रहने वाले जनप्रतिनिधि इस गंभीर मुद्दे पर अब तक मुखर क्यों नहीं हुए। क्या वे इस मामले में भी सख्त रुख अपनाकर प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करवाएंगे, या यह मुद्दा भी कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
जनता का सवाल—कब मिलेगी राहत?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर लोनी की आम जनता कब तक जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर रहेगी? क्या जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगे, या फिर यह स्थिति यूं ही बनी रहेगी?
अब जबकि लोनी का नाम विश्व स्तर पर प्रदूषण के मामले में शीर्ष पर आ चुका है, ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियां और जनप्रतिनिधि मिलकर ठोस और सख्त कदम उठाएं, ताकि लोगों को स्वच्छ हवा मिल सके और इस बदनाम छवि से लोनी को बाहर निकाला जा सके।
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