हापुड़

सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (सिम्स), हापुड़ ने रचा नया इतिहास

ईएनटी विभाग ने अत्यंत दुर्लभ लेटरल थाइरोग्लॉसल सिस्ट का सफल ऑपरेशन कर स्थापित किए चिकित्सा उत्कृष्टता के नए मानदंड

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो

हापुड़ – सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल (सिम्स), हापुड़ ने उन्नत, विशेषज्ञ एवं आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण एवं गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 23 वर्षीय युवक हिमांशु के दुर्लभ एवं जटिल थाइरोग्लॉसल सिस्ट तथा थायरॉयड सूजन का सफल सर्जिकल उपचार किया है। यह जटिल सर्जरी संस्थान के ईएनटी (कान, नाक एवं गला) विभाग द्वारा अत्यंत उच्च स्तर की विशेषज्ञता, सटीकता और आधुनिक तकनीकों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न की गई, जो सिम्स की बढ़ती चिकित्सा क्षमता और उत्कृष्टता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

मरीज हिमांशु, जो कि 23 वर्षीय पुरुष हैं, काफी समय से गर्दन में असामान्य सूजन एवं गांठ की समस्या से परेशान थे। विस्तृत जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के दौरान यह पाया गया कि उन्हें थाइरोग्लॉसल सिस्ट के साथ-साथ थायरॉयड सूजन भी है। यह एक विशेष प्रकार की स्थिति होती है, जिसमें गर्दन में गांठ दिखाई देती है और समय पर उचित उपचार न मिलने पर यह जटिल रूप धारण कर सकती है। इस प्रकार के मामलों में सटीक निदान और समय पर सर्जिकल हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक होता है।

यह मामला चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं दुर्लभ था, क्योंकि सामान्यतः थाइरोग्लॉसल सिस्ट गर्दन के मध्य भाग (मिडलाइन) में पाया जाता है, जबकि इस मरीज में यह सिस्ट गर्दन के बाईं ओर (लेटरल साइड) स्थित था। इस प्रकार की असामान्य स्थिति बहुत कम देखने को मिलती है, जिससे न केवल निदान बल्कि सर्जरी की योजना और निष्पादन भी जटिल हो जाता है।

मामले की जटिलता को और बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि सिस्ट आसपास की मांसपेशियों और ऊतकों से मजबूती से जुड़ा हुआ था। ऐसी स्थिति में सर्जरी के दौरान अत्यधिक सूक्ष्म डिसेक्शन, संरचनाओं की सुरक्षा और किसी भी प्रकार की जटिलता से बचाव के लिए उच्च स्तरीय सर्जिकल कौशल की आवश्यकता होती है। सिम्स के अनुभवी ईएनटी विशेषज्ञों ने अपनी दक्षता, धैर्य और उत्कृष्ट टीमवर्क का परिचय देते हुए इन सभी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया और बिना किसी जटिलता के सिस्ट को पूर्ण रूप से निकाल दिया।
इस जटिल सर्जरी को सिस्ट्रंक प्रक्रिया के माध्यम से किया गया, जिसे थाइरोग्लॉसल सिस्ट के उपचार के लिए विश्व स्तर पर ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ तकनीक माना जाता है। इस उन्नत प्रक्रिया में केवल सिस्ट को हटाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उससे जुड़े ट्रैक्ट (डक्ट) और हायॉइड हड्डी के एक हिस्से को भी सावधानीपूर्वक हटाया जाता है। इससे सिस्ट के दोबारा बनने (रिकरेंस) की संभावना अत्यंत कम हो जाती है और मरीज को दीर्घकालिक एवं बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।

यह सफल सर्जरी एक अत्यंत अनुभवी, समर्पित और कुशल टीम द्वारा संपन्न की गई, जिसमें डॉ. अविनाश कुमार (विभागाध्यक्ष, ईएनटी), डॉ. शुभम मित्तल (सहायक प्रोफेसर), डॉ. नंदिनी सेठी (सहायक प्रोफेसर) एवं डॉ. प्रीति (सीनियर रेजिडेंट) शामिल रहे। टीम के सामूहिक अनुभव, सूक्ष्म सर्जिकल कौशल और उत्कृष्ट समन्वय ने इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर संस्थान के प्रबंधन ने ईएनटी विभाग को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। प्राचार्या बरखा गुप्ता, वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर डॉ. आर. के. सहगल, महाप्रबंधक एन. वर्धराजन, निदेशक रघुवर दत्त एवं चिकित्सा अधीक्षक मेजर जनरल सी. एस. आहलूवालिया ने टीम के उत्कृष्ट कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता न केवल संस्थान की चिकित्सा उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र में उन्नत एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की सिम्स की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

इसके अतिरिक्त, सरस्वती समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. जे. रामचंद्रन तथा उपाध्यक्ष रम्या रामचंद्रन ने भी पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार की जटिल एवं दुर्लभ सर्जरी का सफल निष्पादन संस्थान के उच्च मानकों, आधुनिक तकनीकों एवं मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि सिम्स हापुड़ निरंतर चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है और क्षेत्रीय स्तर पर विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है।

जनजागरूकता संदेश:
थाइरोग्लॉसल सिस्ट एवं थायरॉयड सूजन ऐसी स्थितियां हैं, जिनमें गर्दन में गांठ या सूजन दिखाई देती है। यदि आपके या आपके आसपास किसी व्यक्ति के गर्दन में किसी प्रकार की सूजन, गांठ या असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श, उचित जांच और सही उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

यह सफलता सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (सिम्स), हापुड़ के ईएनटी विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह दर्शाती है कि संस्थान दुर्लभ, जटिल एवं उच्च जोखिम वाले मामलों का भी सफलतापूर्वक उपचार करने में सक्षम है। यह उपलब्धि पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं एनसीआर क्षेत्र में सिम्स हापुड़ की पहचान को एक विश्वसनीय, आधुनिक एवं उन्नत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में और अधिक सुदृढ़ करती है। अब मरीजों को जटिल सर्जरी और विशेषज्ञ उपचार के लिए बड़े महानगरों का रुख करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सिम्स हापुड़ में ही उन्हें अत्याधुनिक सुविधाओं और अनुभवी विशेषज्ञों के साथ उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

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