ललितपुर

कला भवन मेे निशुल्क कला साधना शिविर का भव्य शुभारम्भ

कला पद, प्रतिष्ठा, वैभव देने का अथाह सागर है : ओमप्रकाश बिरथरे

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
ललितपुर। सिद्धन रोड स्थित कला भवन में कलाविद् ओमप्रकाश बिरथरे द्वारा 05 अप्रैल से 03 मई 2026 तक आयोजित निशुल्क कला साधना शिविर का शुभारम्भ अतिथिगण प्राशिसं महामंत्री शकुंतला कुशवाहा, पूर्व प्रधानाचार्य शान्ति मालवीय, संयोजक इन्टैक सन्तोष कुमार शर्मा एवं संयोजक ओमप्रकाश बिरथरे ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलन एवं सरस्वती पूजन द्वारा कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर अंग वस्त्र एवं बैज अलंकरण कर अतिथियों को सम्मानित किया गया। शिविर आयोजक ओमप्रकाश बिरथरे ने शिविर के बारे में बताते हुये कहा कि आज के डिजिटल और तेज रफ्तार युग मेंं चित्रकला की उपयोगिता केवल सौन्दर्य तक सीमित न रहकर मानसिक स्वास्थ्य, व्यवसायिक रचनात्मकता और भावनात्मक अभिव्यक्ति के एक सशक्त माध्यम के रूप में उभरी है। आज के समय में कला केवल शौक नहीं, बल्कि सशक्त कैरियर का माध्यम भी बन रही है। इस दिशा में यह शिविर इन कलासाधकों के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध हो सकता है। इस अवसर पर उन्होंने कला जगत में पेन्टिंग के बढ़ते हुये महत्व को बताते हुये राजा वर्मा द्वारा यशोदा कृष्ण की पेन्टिंग, जो 167.20 करोड़ रूपये में बिकी है, जिसनें एम.एफ. हुसैन की ग्राम यात्रा 118 करोड़ बिक्री का रिकार्ड तोड़ा है, का जिक्र करते हुये डच चित्रकार विन्सैंट बांगगाग के जीवन संघर्ष के बारे में बताया, जो जीवन भर उपेक्षा का शिकार रहा, बाद में उसके मरने के बाद उसकी पैंन्टिंग करोड़ों में बिकी। मुख्य अतिथि ने कहा कि जब कोई व्यक्ति कला सीखता है, तो वह दुनिया को देखने का एक नया दृष्टिकोण विकसित करता है। कला मन को शात करती है और तनाव कम करने में सहायक सिद्ध होती है। इंटैक चैप्टर ललितपुर संयोजक ने कहा कि बच्चों में रचनात्मकता और आत्मविश्वास एवं संवेदनशीलता विकसित करने में कला की महत्चपूर्ण भूमिका होती है। इसके साथ ही कला हमारी संस्कृति, परम्परा और समाज की पहचान को सुरक्षित रखती हैं। साथ ही पूर्व प्रधानाचार्य शांति मालवीय, अरमान कुरैशी, वरिष्ठ पत्रकार विनोद त्रिपाठी, कृष्णकांत सोनी, एम.पी. दीक्षित, डा.जीत गुप्ता ने भी कलासाधकों को सम्बोधित किया। शिविर में 50 कलासाधक प्रतिभाग कर रहे हैं। इस अवसर पर संस्कार भारती के संरक्षक गोविन्द नारायण व्यास, महेश प्रसाद बिरथरे, प्रीति चौबे, जयन्त चैबे, उदयभान सिंह, गोविन्दराम सेन, सुरेश साहू, रूचि, तरूण जामकर, सार्थक सक्सेना, संदीप नामदेव, वैभव जैन विशेष रूप उपस्थित रहे। संचालन संस्कार भारती के अध्यक्ष बृजमोहन संज्ञा द्वारा किया गया।
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