शामली

भभीसा के 50वें महायज्ञ में माता रानी के जागरण पर झूमे श्रद्धालु

विशाल भंडारे के साथ संपन्न हुआ मास्टर वेदपाल सिंह का 50वां महायज्ञ

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

कांधला। क्षेत्र के ग्राम भभीसा में आयोजित गायत्री महायज्ञ का 50वां वार्षिक आयोजन मंगलवार को पूर्णाहुति, महाआरती एवं विशाल भंडारे के साथ श्रद्धा और उत्साहपूर्वक संपन्न हो गया। कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर आयोजित माता रानी के भव्य जागरण में श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे और भजनों पर झूमते नजर आए।

जानकारी के अनुसार महायज्ञ का शुभारंभ 26 मई 2026 को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। इसके बाद प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। एक जून की रात्रि में मां भगवती महामाई के जागरण का आयोजन हुआ, जिसमें भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत भक्तिमय भजनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

करीब पांच दशक से इस धार्मिक परंपरा का निर्वहन कर रहे सेवानिवृत्त शिक्षक मास्टर वेदपाल सिंह ने पूरे समर्पण भाव और विधि-विधान के साथ महायज्ञ का आयोजन कराया। मंगलवार को पूर्णाहुति के पश्चात महाआरती एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

कार्यक्रम में महर्षि महेश संस्थान के पदाधिकारी एल.एस. सोम, गिरीश अग्निहोत्री, शामली विधायक प्रसन्न चौधरी, स्वर्णकार समाज के जिलाध्यक्ष संजीव वर्मा, भाजपा जिला मंत्री विवेक प्रेमी, सुरेंद्र शर्मा, राजीव चौधरी, बृजपाल सिंह, प्रमोद कुमार, नरेंद्र कुमार, सूरज पंडित, देवेंद्र भार्गव, अक्षय कुमार उर्फ मोंटी सहित सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु एवं ग्राम प्रधान उपस्थित रहे।

भभीसा को ‘भभीसा धाम’ बनाने का संकल्प

महायज्ञ के दौरान वक्ताओं ने कहा कि नोएडा स्थित महर्षि महेश योगी संस्थान से जुड़े मास्टर वेदपाल सिंह वर्ष 1976 से इस महायज्ञ की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। धार्मिक एवं आध्यात्मिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से उन्होंने यज्ञ के साथ माता रानी के जागरण, भंडारे एवं उपहार वितरण जैसी गतिविधियों को भी जोड़ा है।

करीब 75 वर्ष की आयु में भी मास्टर वेदपाल सिंह पूरे उत्साह के साथ इस धार्मिक परंपरा का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने इच्छा जताई कि उनके बाद भी यह महायज्ञ निरंतर चलता रहे और गांव का प्रत्येक सनातनी परिवार इस परंपरा से जुड़े। उनका मानना है कि यदि पूरे गांव में यज्ञ और आध्यात्मिक संस्कारों की यह धारा निरंतर प्रवाहित होती रही तो आने वाले समय में भभीसा गांव ‘भभीसा धाम’ के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।

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