असम के नगाँव में जिला स्तरीय डायरिया रोकथाम अभियान शुरू।
आयुक्त देबाशीष शर्मा की मौजूदगी में अभियान का शुभारंभ।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के नगाँव जिला आयुक्त देबाशीष शर्मा की मौजूदगी में शुक्रवार को नगाँव जिला आयुक्तालय के सभाकक्ष में जिला स्तरीय डायरिया (दस्त) प्रतिरोध अभियान का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला आयुक्त (स्वास्थ्य) कमलजीत शर्मा, संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक डॉ. पंकज कुमार बोरा, जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी विकास शर्मा, स्कूल पर्यवेक्षक, नगाँव मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक, जन-स्वास्थ्य तकनीकी विभाग के प्रतिनिधि, जिला टीकाकरण अधिकारी, जिला नोडल अधिकारी (बाल एवं मातृ स्वास्थ्य), जिला नोडल अधिकारी (विद्यालय स्वास्थ्य) सहित हर खंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के महकुम स्वास्थ्य व चिकित्सा अधिकारी, जिला योजना प्रबंधक व समस्त खंड योजना प्रबंधक, तथा नागाँव शहरी स्वास्थ्य खंड के आशा तथा एएनएम कर्मी उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान जिला नोडल अधिकारी (बाल स्वास्थ्य) ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से डायरिया रोकथाम और प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों को डायरिया के शुरुआती लक्षण, समय पर ORS व जिंक के उपयोग, स्वच्छ पेयजल और सही हाथधोने की आदत अपनाने पर जोर देने की शिक्षा दी गई।एक प्रदर्शनी में 1 लीटर पानी में ORS घोल तैयार करने का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया, ताकि स्वास्थ्यकर्मी ग्राम-स्तर पर त्वरित उपचार कर सकें। कार्यक्रम के अवसर पर पांच वर्ष से कम आयु के तीन बच्चों को अतिरिक्त जिला आयुक्त (स्वास्थ्य) की ओर से ORS पैकेट और जिंक टैबलेट वितरित किए गए। यह वितरण डायरिया संबंधित रोगों की रोकथाम और समय पर प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया।जिला आयुक्त देबाशीष शर्मा ने सभी उपस्थित अधिकारियों व स्वास्थ्य कर्मियों से अनुरोध किया कि वे 16 जून से 31 जुलाई तक चलने वाले इस डायरिया प्रतिरोध अभियान को पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि समुदाय में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, नियमित रूप से हाथ धोने की आदत और बच्चों को समय पर ORS व जिंक देने से डायरिया से होने वाली बीमारियों व मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। जिला स्तरीय कर्मचारीगण घर-घर जाकर स्वास्थ्य शिक्षा देंगे तथा जरूरतमंद परिवारों तक आवश्यक दवाइयां व सलाह पहुंचाएंगे।अधिकारियों ने अभियान की रूपरेखा, जिम्मेदारियां और क्षेत्रवार लक्ष्य तय करते हुए निगरानी व रिपोर्टिंग के निर्देश दिए। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को सशक्त बनाना, समुदाय में प्राथमिक उपचार की जानकारी फैलाना और डायरिया रोकथाम व प्रबंधन के माध्यम से मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाना बताया गया।



