बागपत

फ़र्श से अर्श तक: सेवा, संघर्ष और समर्पण की प्रेरक गाथा – डॉ. दिनेश बंसल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। आज के समय में जब चिकित्सा क्षेत्र को अक्सर व्यवसायिक दृष्टि से देखा जाता है, तब कुछ ऐसे चिकित्सक भी हैं जिन्होंने अपने पेशे को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि मानव सेवा का संकल्प बनाया है। ऐसे ही व्यक्तित्व हैं डॉ. दिनेश बंसल, जो मैनावती हॉस्पिटल, गांधी रोड, बड़ौत के माध्यम से वर्षों से चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही वे निस्वार्थ परमार्थ हरित प्राण ट्रस्ट जैसी सामाजिक संस्था का संचालन कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और मानव सेवा के अनेक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
डॉ. दिनेश बंसल का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची सफलता केवल आर्थिक समृद्धि से नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने से मिलती है। संघर्षपूर्ण परिस्थितियों से आगे बढ़ते हुए उन्होंने जो मुकाम हासिल किया, वह उनके अथक परिश्रम, ईमानदारी और सेवा-भाव का परिणाम है। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने अपनी सफलता को समाज की खुशहाली से जोड़ दिया।
चिकित्सा नहीं, मानवता की साधना
डॉ. बंसल का मानना है कि मरीज केवल दवा से नहीं, बल्कि विश्वास और अपनत्व से भी स्वस्थ होता है। यही कारण है कि उनके अस्पताल में आने वाला प्रत्येक मरीज केवल उपचार ही नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मीयता का अनुभव भी करता है।
चिकित्सक का सफेद कोट केवल एक पहचान नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। डॉ. बंसल इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाते हैं। उनका प्रयास रहता है कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति भी बेहतर चिकित्सा सुविधा से वंचित न रहे। यही सोच उन्हें एक डॉक्टर से बढ़कर समाजसेवी बनाती है।
निस्वार्थ परमार्थ हरित प्राण ट्रस्ट: सेवा का विस्तृत अभियान
डॉ. दिनेश बंसल के नेतृत्व में संचालित निस्वार्थ परमार्थ हरित प्राण ट्रस्ट समाज के विभिन्न वर्गों के लिए लगातार कार्य कर रहा है। यह संस्था केवल सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाने का भी कार्य कर रही है।
ट्रस्ट के माध्यम से समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, जरूरतमंद मरीजों की सहायता, गरीब परिवारों को सहयोग, रक्तदान शिविर, पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण अभियान, स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम तथा अन्य सामाजिक गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं। संस्था का उद्देश्य केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक जरूरतमंद तक सहायता पहुंचाना है।
“हरित प्राण” नाम अपने आप में प्रकृति और जीवन के बीच गहरे संबंध का संदेश देता है। ट्रस्ट पर्यावरण संरक्षण को भी उतना ही महत्व देता है जितना मानव सेवा को। बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के दौर में पौधारोपण और हरियाली बढ़ाने जैसे अभियान भविष्य की पीढ़ियों के लिए अमूल्य योगदान हैं।
समाज में विश्वास की नई मिसाल
आज जब समाज में स्वार्थ की भावना बढ़ती दिखाई देती है, तब डॉ. दिनेश बंसल जैसे लोग यह विश्वास जगाते हैं कि सेवा और परोपकार आज भी जीवित हैं। वे केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों के मन में आशा का संचार भी करते हैं।
उनका व्यक्तित्व यह सिखाता है कि यदि समाज का सक्षम वर्ग अपनी आय और समय का एक छोटा-सा हिस्सा भी जनसेवा के लिए समर्पित कर दे, तो हजारों लोगों का जीवन बेहतर बनाया जा सकता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
आज की युवा पीढ़ी तेज़ी से सफलता प्राप्त करना चाहती है, लेकिन डॉ. दिनेश बंसल का जीवन यह संदेश देता है कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल धन अर्जित करना नहीं, बल्कि समाज के लिए उपयोगी बनना है। मेहनत, ईमानदारी, अनुशासन और सेवा—इन चार मूल्यों ने उन्हें समाज में एक सम्मानित स्थान दिलाया है।
समाज के लिए एक संदेश
मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म मानव सेवा है। जब एक चिकित्सक अस्पताल की चारदीवारी से बाहर निकलकर समाज, पर्यावरण और जरूरतमंद लोगों के लिए कार्य करता है, तब वह केवल डॉक्टर नहीं रहता, बल्कि समाज का मार्गदर्शक बन जाता है। डॉ. दिनेश बंसल इसी सोच के साथ निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।
सुरेंद्र मलानिया का वक्तव्य
वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र मलानिया का कहना है कि “आज के दौर में समाज को ऐसे चिकित्सकों और समाजसेवियों की सबसे अधिक आवश्यकता है, जो अपने पेशे को केवल कमाई का माध्यम न मानकर सेवा का मिशन बनाएं। डॉ. दिनेश बंसल ने यह सिद्ध किया है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो, तो एक व्यक्ति हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
निस्वार्थ परमार्थ हरित प्राण ट्रस्ट के माध्यम से स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य वास्तव में अनुकरणीय हैं। ऐसे प्रयास समाज में विश्वास, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं। मेरा मानना है कि समाज को ऐसे लोगों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि सम्मान केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि सेवा और संस्कारों का होता है। जब सेवा करने वालों को प्रोत्साहन मिलता है, तभी समाज में और लोग भी जनहित के कार्यों के लिए प्रेरित होते हैं।”
फ़र्श से अर्श तक का सफर केवल सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की कहानी है। डॉ. दिनेश बंसल ने यह साबित किया है कि जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि वह नहीं जो केवल स्वयं के लिए हो, बल्कि वह है जिससे समाज का कल्याण हो।
मैनावती हॉस्पिटल और निस्वार्थ परमार्थ हरित प्राण ट्रस्ट के माध्यम से वे जिस निस्वार्थ भावना से जनसेवा कर रहे हैं, वह न केवल बड़ौत बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत है। ऐसे व्यक्तित्व समाज की वह पूंजी हैं, जिन पर आने वाली पीढ़ियाँ गर्व कर सकती हैं।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button