बागपत
दर्द का इलाज मंत्रोपचार से! सतीश रुस्तम से की खास बातचीत स्थान: जाजी, सोनीपत, हरियाणा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। सतीश जी, सबसे पहले हमारे दर्शकों को बताइए कि आप क्या कार्य करते हैं और मंत्रोपचार की यह विधि आपने कैसे सीखी?
सतीश रुस्तम:
मैं जाजी, सोनीपत का निवासी हूं। लंबे समय से मंत्रोपचार की परंपरागत विधि से लोगों की सहायता करता आ रहा हूं। शरीर में होने वाले विभिन्न प्रकार के दर्द से परेशान लोग मेरे पास आते हैं। मैं मंत्रों के माध्यम से उनका उपचार करने का प्रयास करता हूं।
लोग किस तरह के दर्द की शिकायत लेकर आपके पास आते हैं?
सतीश रुस्तम:
कमर दर्द, घुटनों का दर्द, कंधे का दर्द, हाथ-पैर में दर्द, सिरदर्द और शरीर के दूसरे हिस्सों में होने वाले दर्द से परेशान लोग मेरे पास आते हैं। कई लोग काफी समय से दर्द से परेशान होते हैं और अलग-अलग जगह इलाज कराने के बाद यहां आते हैं।
आपकी उपचार पद्धति में ऐसा क्या होता है कि लोग राहत महसूस करने की बात कहते हैं?
सतीश रुस्तम:
हमारी मान्यता है कि मंत्रों की साधना और सकारात्मक ऊर्जा का व्यक्ति के मन और शरीर पर प्रभाव पड़ सकता है। मैं अपनी परंपरा और विधि के अनुसार मंत्रोपचार करता हूं। कई लोगों ने उपचार के बाद दर्द में राहत मिलने की बात कही है।
आपके पास ऐसे भी मामले आए हैं, जिन्हें देखकर आपको लगा कि स्थिति बेहद गंभीर थी?
सतीश रुस्तम:
हां, मेरे पास कई ऐसे लोग आए हैं जिनकी हालत देखकर परिवार काफी परेशान था। कुछ मामलों में लोगों ने उपचार के बाद राहत महसूस की और परिवार वालों ने इसे बहुत बड़ा अनुभव माना। मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी यही होती है कि किसी परेशान व्यक्ति को राहत मिले।
आपके बारे में कहा जाता है कि आपने दर्जनों लोगों को दर्द से राहत देने के साथ-साथ उनकी जान बचाने में भी मदद की है। आप इस बारे में क्या कहना चाहेंगे?
सतीश रुस्तम:
लोग अपने अनुभव के आधार पर ऐसा कहते हैं। कुछ परिवार ऐसे हैं जो आज भी मेरे पास आकर बताते हैं कि उस समय उन्हें बहुत उम्मीद नहीं थी, लेकिन उपचार के बाद स्थिति में सुधार हुआ। हालांकि मैं हमेशा यही कहता हूं कि गंभीर स्थिति में डॉक्टर से चिकित्सा सलाह लेना जरूरी है।
यानी आप आधुनिक चिकित्सा के विरोध में नहीं हैं?
सतीश रुस्तम:
बिल्कुल नहीं। डॉक्टर और अस्पताल अपनी जगह बहुत जरूरी हैं। मंत्रोपचार को मैं अपनी परंपरागत विधि के रूप में देखता हूं। किसी गंभीर बीमारी में डॉक्टर की सलाह और उचित चिकित्सा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
आपके पास आने वाले लोगों से आपकी कोई फीस निर्धारित है?
सतीश रुस्तम:
मैं अपनी क्षमता के अनुसार लोगों की मदद करने का प्रयास करता हूं। मेरा उद्देश्य परेशान व्यक्ति की सहायता करना है।
अंत में हमारे दर्शकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
सतीश रुस्तम:
दर्द या बीमारी को कभी हल्के में न लें। समय पर चिकित्सक की सलाह लें। मन में विश्वास और सकारात्मक सोच रखें। यदि कोई व्यक्ति मंत्रोपचार जैसी परंपरागत विधि अपनाना चाहता है तो उसे इसे चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि अपनी आस्था/परंपरा के रूप में ही देखना चाहिए।
“जाजी, सोनीपत निवासी सतीश रुस्तम से हुई इस बातचीत में उन्होंने मंत्रोपचार के माध्यम से लोगों को दर्द में राहत मिलने के अपने अनुभव साझा किए। उनके बारे में कई लोग राहत मिलने की बात बताते हैं। हालांकि किसी भी गंभीर बीमारी या जीवन-रक्षक स्थिति में योग्य चिकित्सक और अस्पताल की चिकित्सा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।”



