असम

असम में बाढ़ का कोहराम

ऊपरी जिलों में 80,000 लोग अब भी राहत से वंचित,मौतों की संख्या 50 पहुंची।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को बताया कि ऊपरी असम के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में लगभग 80,000 लोग अभी तक राहत सामग्री नहीं पहुंच पाने के कारण फंसे हुए हैं। भारी बाढ़ के कारण नाज़ीरा में करीब 50,000 और सिवसागर में लगभग 30,000 लोग ऐसे हैं जिन्हें अभी तक सरकार और राहत एजेंसियाँ पहुंच नहीं पाई हैं।मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा कि कई स्थानों पर पानी का स्तर धीरे-धीरे कम हुआ है, लेकिन कई दूरस्थ गाँवों की संपर्क-सुविधाएँ बाधित बनी हुई हैं, जिससे रेस्क्यू और राहत कार्यों में चुनौतियाँ आ रही हैं। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना और ज़िला प्रशासन की टीमें नाव और उपलब्ध अन्य साधनों से कटे हुए इलाकों तक पहुँचने के लिए लगातार कोशिशें कर रही हैं।सरमा ने भरोसा व्यक्त किया कि शीघ्र ही सभी प्रभावित लोगों तक राहत पहुँचाई जाएगी और प्रशासन स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए है तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त संसाधन तैनात किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि राज्य में बाढ़ से हुई जान-माल की हानि के तहत मृतकों की संख्या अब 50 हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि खोजबीन जारी होने और कई लोग अभी भी लापता होने के कारण यह आँकड़ा बढ़ भी सकता है।बिजली आपूर्ति भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुई है; मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में 60,000 से अधिक परिवारों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित जलभरित क्षेत्रों में पहुँच न होने के कारण मरम्मत कार्यों में देरी हो रही है, हालांकि बिजली बहाली के प्रयास जारी हैं।सरमा ने यह भी बताया कि केंद्रीय सरकार की एक अंतर-मंत्रालयीय टीम शनिवार को असम आएगी ताकि प्रभावित क्षेत्रों का ऑन-ग्राउंड आकलन किया जा सके और वित्तीय सहायता तथा पुनर्वास की आवश्यकताओं की समीक्षा की जा सके। इस वर्ष के मॉनसून सीज़न में भारी वर्षा और उपरी धाराओं से पानी आने के कारण ऊपरी असम के सिवसागर, चराइदेो और जोरहाट जिलों में व्यापक बाढ़ आई है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर रेस्क्यू व राहत अभियान चलाए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और सुरक्षित स्थानों पर रहकर राहत टीमों के साथ सहयोग करें। प्रशासन ने प्रभावितों के लिए अस्थायी शरणस्थल, खाने-पीने का सामान और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने की बात कही है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button