बागपत
कांवड़ यात्रा में दांतों की सेहत का रखें विशेष ध्यान
तेज गर्मी, डिहाइड्रेशन, मीठे पेय और खान-पान की लापरवाही से बढ़ सकती हैं दांत-मसूड़ों की समस्याएं

दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. मेहा सिंह ने कांवड़ यात्रियों को दिए महत्वपूर्ण सुझाव
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत। सावन के महीने में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। कांवड़ यात्रा आस्था और श्रद्धा से जुड़ी होने के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी काफी चुनौतीपूर्ण होती है। कई-कई किलोमीटर पैदल चलने के दौरान तेज गर्मी, उमस, पसीना, धूप, थकान और पर्याप्त पानी न पी पाने की स्थिति शरीर को प्रभावित करती है। ऐसे में श्रद्धालुओं को पैरों, त्वचा और शरीर की देखभाल के साथ दांतों एवं मसूड़ों की सेहत पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. मेहा सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में कांवड़ यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की होती है। शरीर में पानी की कमी होने पर मुंह में लार का निर्माण कम हो सकता है। लार मुंह को प्राकृतिक रूप से साफ रखने और बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लार कम होने पर मुंह में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे मुंह की दुर्गंध, दांतों में कैविटी, मसूड़ों में सूजन और संक्रमण जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
लगातार मीठे पेय का सेवन भी नुकसानदायक
कांवड़ यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेय, मीठे पेय, जूस, टॉफी, मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थ उपलब्ध रहते हैं। डॉ. मेहा सिंह के अनुसार अत्यधिक मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थ दांतों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इनके अवशेष दांतों पर चिपके रहने से बैक्टीरिया को बढ़ने का अवसर मिलता है और लंबे समय में दांतों में सड़न यानी कैविटी की समस्या हो सकती है।
उन्होंने सलाह दी कि यदि यात्रा के दौरान मीठा या कोई खाद्य पदार्थ खाया जाए तो साफ पानी से अच्छी तरह कुल्ला कर लेना चाहिए। संभव हो तो यात्रा के दौरान अपना टूथब्रश और टूथपेस्ट साथ रखें और सुबह-शाम नियमित रूप से ब्रश करें।
पानी की कमी से बढ़ सकती है मुंह की परेशानी
कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु कई घंटे लगातार पैदल चलते हैं। तेज गर्मी में पसीना आने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। डॉ. मेहा सिंह ने कहा कि यात्रियों को प्यास लगने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि नियमित अंतराल पर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए।
नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और मौसमी फलों जैसे संतुलित विकल्प भी उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि अत्यधिक मीठे और शर्करा युक्त पेय का बार-बार सेवन करने से बचना चाहिए।
दांतों में अचानक दर्द को नजरअंदाज न करें
कांवड़ यात्रा के दौरान यदि किसी श्रद्धालु को अचानक दांत में तेज दर्द, ठंडा-गर्म लगना, मसूड़ों में सूजन, खून आना या मुंह में किसी प्रकार की परेशानी महसूस होती है तो इसे सामान्य समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉ. मेहा सिंह ने कहा कि दांत का दर्द केवल दांत तक सीमित समस्या नहीं है। कई बार इसके पीछे दांतों में संक्रमण, कैविटी या मसूड़ों की बीमारी हो सकती है। ऐसी स्थिति में दर्द को दबाने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
गुटखा-तंबाकू से रहें पूरी तरह दूर
कांवड़ यात्रा के दौरान कई लोग थकान मिटाने या समय गुजारने के लिए गुटखा, तंबाकू, बीड़ी और सिगरेट का सेवन करते हैं। डॉ. मेहा सिंह ने इसे दांतों और मुंह के लिए बेहद नुकसानदायक बताया।
तंबाकू का सेवन मसूड़ों की बीमारी, दांतों पर दाग, मुंह की दुर्गंध और गंभीर मौखिक रोगों का खतरा बढ़ा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान ही नहीं बल्कि सामान्य जीवन में भी तंबाकू से दूरी बनाने की अपील की।
यात्रा के दौरान रखें यह छोटी-सी किट
कांवड़ यात्रियों को अपने साथ एक छोटी ओरल केयर किट रखनी चाहिए, जिसमें टूथब्रश, टूथपेस्ट, साफ पानी की बोतल और जरूरत के अनुसार चिकित्सक द्वारा सुझाई गई दवाएं शामिल हों। यात्रा के दौरान दूसरों का टूथब्रश इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
खाने के बाद साफ पानी से कुल्ला करना भी दांतों की सुरक्षा का आसान तरीका है। लंबे समय तक खाली पेट रहने से भी बचना चाहिए और हल्का, पौष्टिक एवं संतुलित भोजन लेते रहना चाहिए।
बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
कांवड़ यात्रा में बच्चों के साथ जाने वाले अभिभावकों को उनके खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यात्रा के दौरान बच्चे अक्सर टॉफी, चॉकलेट, मिठाई और मीठे पेय का अधिक सेवन कर लेते हैं। लगातार मीठा खाने के बाद दांतों की सफाई नहीं होने पर बच्चों में कैविटी की समस्या तेजी से बढ़ सकती है।
डॉ. मेहा सिंह ने कहा कि बच्चों को समय-समय पर पानी पिलाते रहें और मीठे खाद्य पदार्थों के बाद पानी से कुल्ला कराने की आदत डालें।
आस्था के साथ स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
डॉ. मेहा सिंह ने कहा कि कांवड़ यात्रा श्रद्धा और आस्था की यात्रा है, लेकिन इस दौरान स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। पर्याप्त पानी, साफ-सफाई, संतुलित खान-पान और नियमित दांतों की सफाई को अपनी यात्रा का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दांतों और मसूड़ों की थोड़ी सी नियमित देखभाल श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान होने वाली कई परेशानियों से बचा सकती है। कांवड़ उठाते समय भगवान शिव की भक्ति के साथ अपने स्वास्थ्य और दांतों की सुरक्षा का भी संकल्प लें।



