
नई दिल्ली । संसद में जारी हंगामे के बीच, कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने ‘मोदिया बिंद’ चश्मे के जरिए सरकार के आलोचकों पर कटाक्ष करते हुए सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों को निशाने पर लिया। विपक्ष ने जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध और राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित चोरी सहित कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा, जिससे संसदीय कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। यह घटनाक्रम देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर बहस की आवश्यकता और राजनीतिक जवाबदेही की मांग को रेखांकित करता है। सोमवार को कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने देश के अहम मुद्दों को लेकर सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों पर तीखा तंज कसा। उन्होंने मोदिया बिंद नाम के स्टिकर वाला चश्मा दिखाते हुए कहा कि यह उन राजनीतिक आलोचकों के लिए मेडिकल इलाज है, जिन्हें उन्होंने अंधभक्त कहा। मीडिया को चश्मा दिखाते हुए, चौधरी ने प्रशासन की कामकाज और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कमियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिना सोचे-समझे तारीफ करने के चक्कर में जरूरी मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ये चश्मे उन ‘अंधभक्तों’ के इलाज के लिए हैं… उन्हें चोरी का मुद्दा नहीं दिखता; उन्हें पुल का गिरना नहीं दिखता; उन्हें नीट परीक्षा का मुद्दा नहीं दिखता; वे बस तारीफ करते हैं। इसलिए, मुझे लगा कि हमें उनके सही इलाज का इंतजाम करना चाहिए। अगर मोतियाबिंद हुआ, तो उसका भी इलाज करवा देंगे। इससे पहले, सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच चार अहम बिल पेश किए गए। इनमें ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल, 2026; माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026; केरल (नाम में बदलाव) बिल, 2026; और नेशनल कोआॅपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026 शामिल हैं।
बाद में सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई, क्योंकि विपक्षी सांसद जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित चोरी के मामले में सरकार से जवाब की मांग को लेकर विरोध करते रहे। मानसून सत्र के दौरान लोकसभा की कार्यवाही में बार-बार रुकावटें आईं और सदन से पास हुए आठ में से छह बिल बिना किसी बहस के ही पास कर दिए गए।
स बीच, समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने संसद में जारी गतिरोध को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और अयोध्या के राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी पर जवाब मांगा। पत्रकारों से बात करते हुए, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट’ (ऋउफअ) संशोधन बिल के बारे में सवाल किए। यादव ने कहा कि हम सरकार से यह सवाल पूछते हैं कि लाठीचार्ज क्यों किया गया, आंसू गैस के गोले क्यों छोड़े गए और बिजली के झटके क्यों दिए गए? अब वे बिल ला रहे हैं। जबकि भारत सरकार और इखढ ने हमें भरोसा दिलाया था कि भारत का पैसा देश से बाहर नहीं जाएगा। अनगिनत लोगों ने आधिकारिक और अनौपचारिक, दोनों तरीकों से भारत से भारी मात्रा में पैसा बाहर भेजा है… सच तो यह है कि वे संस्थानों पर कब्जा करना चाहते हैं। वे जरिए इन संस्थानों पर नियंत्रण करने के तरीके ढूंढ रहे हैं।



