सिंगरौली
चोरियों का भी पैमाना बता रहे CMHO! ‘छोटी’ और ‘बड़ी’ चोरी में फर्क ने खड़े किए सवाल..?
‘ये कोई चोरी है?’—सीएमएचओ के बयान से सरकारी संपत्ति की सुरक्षा पर उठे सवाल..

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली l सिंगरौली जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. पुष्पराज सिंह के कार्यालय में लगे एसी की पाइप काटकर ले जाने की घटना ने सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सिर्फ एक पाइप का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और उसकी जिम्मेदारी तय करने का है।
हैरानी की बात यह है कि जब इस संदर्भ में सीएमएचओ डॉ. पुष्पराज सिंह से फोन पर बात की गई, तो उनके द्वारा कथित तौर पर कहा गया—“ये कोई चोरी है?”
यही बयान अब कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि किसी सरकारी कार्यालय में लगा सामान बिना अनुमति काटकर कोई व्यक्ति ले जाता है, तो उसे क्या माना जाएगा? क्या सरकारी संपत्ति की कीमत कम होने पर उसकी चोरी, चोरी नहीं रह जाती?
सरकारी पैसा क्या खैरात है..?
सवाल यह भी है कि यदि एसी की पाइप चोरी नहीं हुई है और यह महज मामूली नुकसान है, तो क्या इसकी मरम्मत सीएमएचओ डॉ. पुष्पराज सिंह स्वयं अपने निजी पैसे से करवाएंगे?
यदि जवाब नहीं है और मरम्मत या नया सामान लगाने का खर्च सरकारी बजट से ही होना है, तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकारी पैसा क्या किसी की निजी संपत्ति है या खैरात, जिसे नुकसान होने दिया जाए और फिर जनता के पैसे से उसकी भरपाई कर दी जाए.?
सरकारी धन एक-एक रुपये जनता से प्राप्त राजस्व से आता है। ऐसे में सरकारी संपत्ति की सुरक्षा करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। कीमत छोटी होने का तर्क जिम्मेदारी को छोटा नहीं कर देता।
‘तीसरी आंख’ के बावजूद पाइप गायब..?
कार्यालय परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने की बात कही जाती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि एसी की पाइप कब काटी गई? घटना कैमरे में कैद हुई या नहीं? यदि फुटेज उपलब्ध है तो उसे देखा गया या नहीं? और यदि संदिग्ध व्यक्ति की पहचान होती है तो पुलिस को इसकी जानकारी दी गई या नहीं?
अगर सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद सरकारी कार्यालय से सामान गायब हो जाता है और घटना का पता लगाने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो फिर इन कैमरों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
पुलिस में शिकायत हुई या नहीं?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एसी की पाइप काटकर ले जाने की सूचना बैढ़न कोतवाली पुलिस को दी गई.? यदि शिकायत दी गई है तो उसकी जांच कहां तक पहुंची? क्या सीसीटीवी फुटेज पुलिस को उपलब्ध कराई गई? क्या अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू हुई? और यदि शिकायत ही नहीं की गई, तो सरकारी कार्यालय से सामान गायब होने की घटना को पुलिस तक न पहुंचाने का कारण क्या है?
मामला पाइप का नहीं, जवाबदेही का है..?
हो सकता है कि चोरी की गई पाइप की कीमत बहुत अधिक न हो, लेकिन सवाल उसकी कीमत का नहीं है। सवाल यह है कि क्या सरकारी कार्यालय में किसी भी सामान को काटकर कोई व्यक्ति ले जा सकता है और जिम्मेदार अधिकारी उसे मामूली घटना बताकर नजरअंदाज कर सकते हैं?
आज एसी की पाइप गई है, कल कोई महंगा उपकरण, कंप्यूटर, दस्तावेज या अन्य सरकारी सामान भी गायब हो सकता है। यदि छोटी घटना पर ही जवाबदेही तय नहीं होगी तो बड़ी घटना के बाद जिम्मेदारी किसकी होगी?
स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि घटना वास्तव में क्या है, सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन किसने किया, सीसीटीवी फुटेज की जांच हुई या नहीं और पुलिस को सूचना दी गई या नहीं।
एक पाइप की कीमत भले ही कम हो, लेकिन सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और जनता के पैसे की जवाबदेही की कीमत तय नहीं की जा सकती। अब देखना यह है कि विभाग इस घटना पर आधिकारिक रूप से क्या स्पष्टीकरण देता है और पुलिस इस कथित चोरी को लेकर क्या कार्रवाई करती है।
इनका कहना है जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.पुष्पराज सिंह ने इस घटना को मामूली बताते हुए कहा कि हम इसकी शिकायत करवाते हैं..




