ललितपुर

मंदिर के फूलों से बनेगी जैविक खाद

तुवन सरकार मंदिर में कंपोस्टिंग यूनिट शुरू

नगर पालिका और आईटीसी मिशन सुनहरा कल की पहल
फूलों के अपशिष्ट का होगा वैज्ञानिक निस्तारण
मंदिर की हरियाली में इस्तेमाल होगी तैयार खाद
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले फूलों एवं अन्य जैविक अवशेषों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में नगर पालिका परिषद और आईटीसी मिशन सुनहरा कल के संयुक्त तत्वावधान में सराहनीय पहल की गई है। तुवन सरकार मंदिर परिसर में फूलों से जैविक खाद तैयार करने वाली कंपोस्टिंग यूनिट का नपाध्यक्ष सोनाली जैन ने फीता काटकर यूनिट का उद्घाटन किया। इस पहल के तहत मंदिर परिसर में प्रतिदिन निकलने वाले फूलों एवं अन्य जैविक अवशेषों को कचरे के रूप में फेंकने के बजाय वैज्ञानिक एवं पर्यावरण-अनुकूल तरीके से उपयोग में लाया जाएगा। कंपोस्टिंग यूनिट में मंदिर में चढ़ाए गए फूलों को प्रसंस्कृत कर उपयोगी जैविक खाद में परिवर्तित किया जाएगा। तैयार खाद का उपयोग मंदिर परिसर में लगे पौधों, हरियाली के संरक्षण और संवर्धन के लिए किया जाएगा। नपाध्यक्ष सोनाली जैन ने कहा कि मंदिरों से निकलने वाले फूलों का उचित प्रबंधन स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। कचरे को संसाधन में बदलने की यह पहल नगर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि कंपोस्टिंग यूनिट शुरू होने से मंदिर परिसर में फूलों के अपशिष्ट का व्यवस्थित निस्तारण सुनिश्चित होगा। साथ ही इससे तैयार होने वाली जैविक खाद का उपयोग परिसर की हरियाली को बढ़ाने में किया जा सकेगा। कंपोस्टिंग यूनिट के माध्यम से मंदिर में अर्पित फूलों को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित करने की व्यवस्था की गई है। इससे फूलों के अपशिष्ट को इधर-उधर फेंकने अथवा सामान्य कचरे में मिलाने की आवश्यकता नहीं होगी। पहल के जरिए कचरे से संसाधन की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश दिया गया। इस दौरान नपाध्यक्ष सोनाली जैन, एसएफआई जगदीश तिवारी, आईटीसी मिशन सुनहरा कल के शुभम मिश्रा एवं अनूप त्रिवेदी सहित अन्य गणमान्यजन मौजूद रहे। बताया कि धार्मिक स्थलों से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट के उचित प्रबंधन की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण है। मंदिर परिसर में कंपोस्टिंग यूनिट के संचालन से जहां स्वच्छता व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, वहीं तैयार जैविक खाद का स्थानीय स्तर पर उपयोग कर हरियाली को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
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