तृषा सिंह के असामयिक निधन ने मेरे अपने जख्म फिर हरे कर दिए ।
एक पिता होने के नाते दीपिका पांडेय सिंह के दुःख को महसूस कर रहा हूं : विजय शंकर नायक

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
रांची। झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की सुपुत्री तृषा सिंह के सड़क दुर्घटना में हुए असामयिक निधन की हृदयविदारक खबर से मैं स्तब्ध और अत्यंत मर्माहत हूं। इतनी कम उम्र में किसी बेटी का इस तरह अचानक दुनिया से चले जाना माता-पिता के लिए ऐसा दुःख है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं। एक बेटी का जाना केवल एक जीवन का चले जाना नहीं होता, बल्कि माता-पिता के सपनों, उम्मीदों और जीवन के एक बड़े हिस्से का अचानक छिन जाना होता है। मैं स्वयं अपनी बेटी विजयश्री नायक को असमय खोने का असहनीय दर्द झेल चुका हूं। 19 सितंबर 2026 को मेरी बेटी के निधन ने मेरे जीवन में जो गहरा खालीपन पैदा किया है, उसे मैं आज भी महसूस कर रहा हूं। ऐसे में तृषा के निधन की खबर ने मेरे अपने जख्म फिर हरे कर दिए हैं। एक पिता होने के नाते मैं उस पीड़ा को महसूस कर सकता हूं, जब घर में बेटी की आवाज हमेशा के लिए खामोश हो जाए, उसकी हंसी केवल स्मृतियों में रह जाए और माता-पिता की आंखें उसे तलाशती रह जाएं। बेटी की अर्थी को कंधा देने का दर्द किसी भी माता-पिता के लिए जीवन के सबसे कठिन क्षणों में से एक होता है। इस पीड़ा के सामने शब्द अक्सर निरर्थक हो जाते हैं। इस अत्यंत दुःखद और कठिन घड़ी में मैं दीपिका पांडेय सिंह एवं उनके पूरे परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना और आत्मीय शोक प्रकट करता हूं। तृषा के निधन से उत्पन्न इस अपूरणीय क्षति में मेरी संवेदनाएं परिवार के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत तृषा सिंह की आत्मा को शांति प्रदान करें तथा उनकी मां, पिता और परिवार के सभी सदस्यों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति, साहस और संबल प्रदान करें। आज एक मां ने अपनी बेटी खोई है और एक पिता ने बेटी को खोने का अपना पुराना दर्द फिर महसूस किया है।



