असम में पांच साल के GPS सर्वे से हाथियों की चाल-ढाल पर नई रिपोर्ट
चाय-बागान और नदीनाल बने प्रमुख मार्ग।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम वन विभाग और WWF‑इंडिया के संयुक्त पांच साल के GPS‑ट्रैकिंग अध्ययन ने राज्य में जंगली एशियाई हाथियों के आवागमन व आवास उपयोग के बारे में अहम जानकारी दी है। 2021 से 2026 के बीच उदालगुड़ी, सोनितपुर और बिस्वनाथ के तीन मानव‑हाथी संघर्ष जिलों में चार मादा‑नेतृत्व वाली झुंडों और एक एकल नर हाथी पर कॉलर लगाए गए। इस अध्ययन ने 38,000 से अधिक उच्च‑रिज़ॉल्यूशन GPS लोकेशन उत्पन्न किए, जिनसे बहु‑उपयोग वाले परिदृश्यों में मौसमी गतिशीलता स्पष्ट हुई। रिपोर्ट “Tracking the Giants: Movement and Habitat‑Use Patterns of GPS‑Collared Elephants in Assam” को आज वन मंत्री जयंत मल्ल बरुवा ने प्रस्तुत किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि असम एशियाई हाथियों का प्रमुख ठिकाना बना हुआ है, पर आवास ह्रास व बिगड़ती पारिस्थितिकी ने न सिर्फ हाथियों की संख्या व व्यवहार को प्रभावित किया है बल्कि स्थानीय समुदायों के जीवन व आजीविका पर भी विपरीत प्रभाव डाला है। फसल और संपत्ति का नुकसान, मानवीय हताहत और हाथियों की चोट या मृत्यु इसके नतीजे रहे हैं। बहु‑उपयोग वाले परिदृश्य: कॉलर किए हाथियों ने जंगलों, चाय बागानों, कृषि भूमि और नदी‑नालों में गतिशीलता दिखाई; चाय बागान अक्सर पारगमन मार्ग और द्वितीयक आवास के रूप में उपयोग हुए, जिससे मानव संपर्क बढ़ा।
सोनाई रूपाई, बेहाली और बोरनदी वन्यजीव अभ्यारण्य कॉलर किए हाथियों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किए गए हैं। मादा‑नेतृत्व वाली झुंडों के होम‑रेंज धान की कटाई/रोपण सीज़न में विस्तृत हुए; यही समय मानव‑हाथी संघर्ष के उच्च स्तर से जुड़ा पाया गया। हाथी हिमालयी उपवस्त्रों से ब्रह्मपुत्र के चापोरी घासभूमि तक उत्तर‑दक्षिण गति के लिए नदी नालों का उपयोग कर रहे हैं, जो उनके पारगमन मार्गों की समझ के लिए महत्वपूर्ण है। कई आवागमन मार्ग सड़कें, रेलवे और बस्तियों को काटते हैं, जिससे मानव और हाथियों दोनों के लिए जोखिम बढ़ता है और त्वरित निवारक उपायों की आवश्यकता है। सूखा मौसम में उदालगुड़ी से भूटान के जॉमोटसांक्खा वन्यजीव अभ्यारण्य तक सीमा‑पार आंदोलन दर्ज हुआ, जिससे पार‑सीमाई समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया गया है।सिफारिशें और निहितार्थस्थानिक व मौसमी रणनीतियाँ बनाना, GPS‑आधारित जानकारी के अनुसार फसल‑सुरक्षा और चेतावनी प्रणाली लागू करना। सड़कों व रेलवे मार्गों पर गति नियंत्रण, संकेतक, वन्यजीव पासेज व सुरक्षा उपाय लगाना।चाय क्षेत्र चिह्नित मार्गों में उद्योग के साथ समन्वय कर सहयोगी प्रोटोकॉल अपनाना। भूटान के साथ कॉरिडोर संरक्षण और संयुक्त निगरानी बढ़ाना। वन विभाग के प्रधान मुख्य संरक्षक (वन‑वन्यजीव) डॉ. विनय गुप्ता ने कहा कि यह रिपोर्ट राज्य में हाथियों की उपस्थिति और गतिशीलता पर बड़ा वैज्ञानिक‑आधारित प्रमाण देती है और मानव‑हाथी सहअस्तित्व नीतियों को मजबूत करने में मददगार होगी। WWF‑इंडिया के हाथी संरक्षण प्रमुख अरित्रा क्षेत्री ने कहा कि उच्च‑रिज़ॉल्यूशन GPS‑डेटा ने मुख्य तथा द्वितीयक आवास और मौसमी गतिशीलता को स्पष्ट किया है, जो संघर्ष प्रबंधन के लिए निर्णायक होंगे। रिपोर्ट दर्शाती है कि वैज्ञानिक निगरानी, स्थानीय समुदायों का समन्वय और पार‑सीमाई सहयोग मिलकर असम में मानव और हाथियों के बीच समुचित सहअस्तित्व सुनिश्चित कर सकते हैं।


