गोड्डा

नवजात की मौत पर पोड़ैयाहाट सीएचसी में हंगामा, भाजपा ने दिया धरना

 डॉक्टर, नर्स और एंबुलेंस चालक पर लापरवाही का आरोप

कार्रवाई व मुआवजे की मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
पोड़ैयाहाट। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में नवजात शिशु की मौत के बाद शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। बांसमुड़ी गांव निवासी इस्माइल अंसारी की पत्नी मरजीना बीवी के नवजात की मौत से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। घटना के विरोध में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी स्वास्थ्य केंद्र परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले डॉक्टर, नर्स और एंबुलेंस चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। परिजनों के अनुसार, गर्भवती मरजीना बीवी का प्रसव शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था। परिजनों का आरोप है कि पूरी रात कोई डॉक्टर महिला को देखने नहीं आया और नर्स के भरोसे ही प्रसव कराया गया। जन्म के बाद नवजात की स्थिति गंभीर होने पर उसे बेहतर इलाज के लिए गोड्डा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजनों ने एंबुलेंस से नवजात को गोड्डा ले जाने के दौरान भी लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि डीजल के नाम पर एंबुलेंस चालक और एएनएम ने 500 रुपये की मांग की। परिजन 300 रुपये देने को तैयार थे, लेकिन आरोप है कि 500 रुपये से कम लेने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद नवजात को एंबुलेंस से गोड्डा ले जाया जाने लगा। परिजनों के मुताबिक, रास्ते में मानस परिवर्तन के समीप नवजात की तबीयत और बिगड़ने लगी। इस दौरान उन्होंने एंबुलेंस रुकवाकर ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की बात कही। आरोप है कि चालक ने इसकी सूचना स्वास्थ्य केंद्र को दी, जिसके बाद करीब आधे घंटे में ऑक्सीजन पहुंचाया गया। हालांकि, तब तक नवजात की मौत हो चुकी थी। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था और प्रसव के दौरान चिकित्सकीय निगरानी पर सवाल उठाए। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी परिजनों के समर्थन में धरना देकर स्वास्थ्य विभाग से जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रसव के दौरान डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए और गंभीर स्थिति में रेफर किए गए मरीजों को रास्ते में भी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं मिलनी चाहिए।
थाने में लिखित शिकायत, मुआवजे की मांग
धरना-प्रदर्शन के बाद परिजनों ने संबंधित थाने में लिखित शिकायत देकर मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई गई। परिजनों ने घटना की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। फिलहाल, मामले में स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। नवजात की मौत से जुड़े इस मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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