गाजियाबाद

कागजों में आदर्श, जमीन पर बदहाल

लोनी गौशाला में मृत गाय मिलने से खुली व्यवस्थाओं की पोल।

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।

गाजियाबाद ।‌ लोनी के वेद विहार स्थित एसएलएफ गौशाला में अव्यवस्थाओं की तस्वीर उस समय और भयावह हो गई जब सभासद अंकुश जैन ‘मिकू’ ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पशुओं के बीच एक मृत गाय पड़ी मिली, जिसने न सिर्फ प्रबंधन की लापरवाही बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सभासद ने मौके पर देखी स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि नगरपालिका कर्मचारियों के कुप्रबंधन और लापरवाही के चलते गौशाला में रह रहे निराश्रित गोवंश बदहाली का जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिक निरीक्षण के समय ही व्यवस्थाएं ठीक कराते हैं, जबकि सामान्य दिनों में हालात बेहद खराब रहते हैं।
निरीक्षण में सामने आया कि गौशाला में पशुओं के लिए पर्याप्त चारे और साफ व स्वच्छ पानी की व्यवस्था नहीं है। गौशालाओ में पानी की हौद में काई जमी हुई थी और गंदगी साफ दिखाई दे रही थी। वहीं सुबह के समय 8:30 तक भी पशुओं को समय पर चारा नहीं दिया गया, जिससे वे भूखे रहने को मजबूर व विवश दिखे।
गर्मी के मौसम में भी राहत के पर्याप्त इंतजाम नहीं पाए गए। गौशाला में लगे कई पंखे खराब हालत में थे, कुछ बिना पंखुड़ियों के ही लटकते मिले। इससे यह स्पष्ट होता है कि पशुओं की बुनियादी जरूरतों की भी अनदेखी की जा रही है।
गौशाला में सूचना संबंधी व्यवस्थाएं भी पूरी तरह नदारद रहीं। कहीं भी ऐसा बोर्ड नहीं लगा था, जिस पर गौशाला से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध हो। यहां तक कि फायर स्टेशन, पुलिस स्टेशन, चौकीदार और नोडल अधिकारी के संपर्क नंबर भी प्रदर्शित नहीं किए गए थे, जो सुरक्षा और आपात स्थिति में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
सबसे बड़ा सवाल भरण-पोषण के लिए मिलने वाली सरकारी धनराशि को लेकर उठ रहा है। सभासद अंकुश जैन ने कहा कि सरकार द्वारा गौशालाओं के लिए जारी की जाने वाली सुविधाएं और बजट जमीनी स्तर पर नजर नहीं आते, जिससे साफ संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं धन के दुरुपयोग या बंदरबांट का मामला हो सकता है।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप है कि गौशाला में तैनात कर्मचारियों की संख्या और उपस्थिति को लेकर भी पारदर्शिता नहीं है। हाजिरी रजिस्टर में नियमित एंट्री नहीं होने से व्यवस्थाओं पर और संदेह गहराता है।
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर सरकार गौशालाओं को प्राथमिकता देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल विपरीत नजर आती है।
सभासद अंकुश जैन मिकू ने संबंधित अधिकारियों से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल इन गौशाला के नाम पर जारी भरण पोषण राशि की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि गौशाला में रह रहे निराश्रित पशुओं को बेहतर जीवन और आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।

निरीक्षण में सामने आया कि गौशाला में पशुओं के लिए पर्याप्त चारे और साफ व स्वच्छ पानी की व्यवस्था नहीं है। गौशालाओ में पानी की हौद में काई जमी हुई थी और गंदगी साफ दिखाई दे रही थी।

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