
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
लोनी (गाजियाबाद): प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में संरक्षित करने के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री, गौ सुरक्षा आयोग, प्रमुख सचिव एवं मंडल आयुक्त की समीक्षा बैठकों में यह दावा किया जाता रहा है कि सड़कों पर कोई भी निराश्रित पशु नहीं घूम रहा है। लेकिन गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र की स्थिति इन दावों के बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
लोनी क्षेत्र में ऐसा कोई प्रमुख सड़क मार्ग नहीं बचा है जहां दर्जनों की संख्या में गौवंश सड़क पर घूमते या बैठे हुए न दिखाई देते हों। अंकुर विहार से पुस्ता पुलिस चौकी, लोनी बॉर्डर से मंडोला, भौपुरा से लोनी तक जाने वाले मार्गों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात हो गई है। इससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि आए दिन सड़क दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। वाहनों की चपेट में आकर बड़ी संख्या में गौवंश घायल हो रहे हैं, जिससे आम लोगों की जान भी जोखिम में पड़ रही है।
इसके अलावा क्षेत्र में बने खुले नालों में गिरकर गौवंश के घायल होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो स्थानीय अखबारों की सुर्खियां बन रही हैं। कई मामलों में पशु आपस में लड़कर भी गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं।
प्रशासन की उदासीनता पर उठे सवाल
गौ रक्षक आशू पहलवान ने इस गंभीर समस्या को लेकर जिला प्रशासन गाजियाबाद, उपजिलाधिकारी लोनी एवं नगरपालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी से मुलाकात कर क्षेत्र में खुले घूम रहे भूखे-प्यासे पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में संरक्षित करने की मांग की। बावजूद इसके, अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगरपालिका परिषद और पशुपालन विभाग इस समस्या की अनदेखी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि नगरपालिका के रिकॉर्ड की जांच की जाए, तो प्रतिदिन घायल और मृत गौवंश को हटाने के लिए जेसीबी मशीनों के उपयोग का आंकड़ा स्वयं स्थिति की गंभीरता को उजागर कर देगा।
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में अंतर
सरकारी आंकड़ों में भले ही निराश्रित पशुओं को संरक्षित करने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन लोनी की सड़कों पर घूमता गौवंश इन दावों की सच्चाई सामने ला रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक प्रशासन इस समस्या को प्राथमिकता में रखकर ठोस कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक न तो दुर्घटनाएं रुकेंगी और न ही पशुओं की दुर्दशा।
निष्कर्ष
लोनी क्षेत्र में आवारा गौवंश की समस्या अब केवल पशु संरक्षण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई कर इन पशुओं को सुरक्षित गौशालाओं में पहुंचाए, ताकि मानव और पशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। गौ रक्षक आशू पहलवान का कहना है कि यदि जिम्मेदार लोगों ने निराश्रित पशुओं को पकड़कर संरक्षित नहीं किया गया तो वे शीघ्र ही इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग करेंगे


