गाजियाबाद
किसान की संदिग्ध मौत पर लोनी में बवाल
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे घंटों सड़क जाम, वाहनों की लंबी कतारें लगी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी, गाजियाबाद : ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र में किसान सुनील कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद सोमवार को बड़ा हंगामा खड़ा हो गया। परिजनों और ग्रामीणों ने किसान का शव दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे सड़क पर कई घंटों तक यातायात बाधित रहा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि भूमि विवाद, कथित भूमाफियाओं के दबाव और प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसान ने आत्मघाती कदम उठाया।
सड़क पर जाम लगने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपना आक्रोश व्यक्त किया
परिजनों ने अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप,
मृतक के भतीजे ने पुलिस को दिए अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि परिवार लंबे समय से भूमि विवाद को लेकर परेशान था। शिकायत के अनुसार कुछ लोगों द्वारा उनकी जमीन पर दबाव बनाया जा रहा था और पहले भी परिवार के साथ मारपीट की घटना हुई थी। इस संबंध में पुलिस को सूचना दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
परिजनों का आरोप है कि जमीन से जुड़े सर्वे और रिकॉर्ड संबंधी मामलों में भी उनके परिवार पर दबाव बनाया जा रहा था, जिससे किसान मानसिक तनाव में रहता था
सुसाइड नोट मिलने का दावा
परिवार ने दावा किया है कि किसान एक सुसाइड नोट छोड़ गया है, जिसमें कई लोगों को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि नोट में नामजद लोगों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए। हालांकि पुलिस ने अभी सुसाइड नोट की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
डीसीपी ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति
हाईवे जाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ त्रिपाठी ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। काफी देर चली बातचीत और निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने सड़क मार्ग खोला
इलाके में तनाव, जांच जारी
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो पुनः आन्दोलन किया जाएगा। वहीं पुलिस भूमि विवाद, शिकायतों और कथित सुसाइड नोट समेत सभी पहलुओं की गहन जांच में जुटी है।
उठ रहे कई सवाल
किसान की मौत ने एक बार फिर भूमि विवादों, दबंगई और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
