गाजियाबाद
जांच से डर क्यों? घटिया निर्माण की गूंज या चहेतों को बचाने की मजबूरी!
लोनी नगरपालिका में विकास या ‘व्यवस्था’ का खेल? आरोपों की जांच से आखिर क्यों भाग रहे अधिकारी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : गाजियाबाद की लोनी नगरपालिका परिषद में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल अब केवल विपक्ष या आम जनता तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि अब खुद सत्तारूढ़ दल के सभासद भी खुलेआम निर्माण कार्यों में अनियमितताओं और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल के आरोप लगा रहे हैं। भाजपा सभासद रुपेन्द्र चौधरी ने जिलाधिकारी गाजियाबाद को अपना शिकायती पत्र भेजकर जेई मनोज कुमार के कार्यक्षेत्र में पिछले दो वर्षों के दौरान कराए गए विकास कार्यों का संयुक्त टेक्निकल टीम से भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
सभासद का आरोप है कि विकास कार्यों में मानकों को ताक पर रखकर कुछ ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिसके चलते गलियों में मिट्टी भराव की जगह मलबा डाला गया और आरसीसी निर्माण कार्यों में भी निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। अब सवाल यह है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप हुआ है तो फिर जांच कराने में हिचकिचाहट क्यों दिखाई जा रही है?
आखिर शिकायत के बाद जांच से परहेज क्यों?
नगरपालिका में विकास कार्यों को लेकर सभासद आदर्श जाटव और रामनिवास त्रिपाठी भी लगातार घटिया निर्माण सामग्री और गुणवत्ता में भारी कमी के आरोप लगाते रहे हैं। इसके बावजूद यदि शिकायतें केवल फाइलों में दबी रह जाएं और किसी निष्पक्ष तकनीकी जांच का आदेश न हो, तो संदेह होना स्वाभाविक रूप से गहराता है।
लोग अब पूछ रहे हैं कि क्या अधिकारियों को सच सामने आने का डर है? या फिर जांच होने पर उन लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जिन्हें अब तक अधिकारियों का संरक्षण मिलता रहा है? यदि आरोप बेबुनियाद हैं तो जांच कराकर शिकायतकर्ताओं को गलत साबित किया जाए, लेकिन यदि जांच ही नहीं होगी तो सवाल उठेंगे और उठते रहेंगे।
घटिया निर्माण सामग्री या अधिकारियों के संरक्षण का खेल?
नगरपालिका के विकास कार्यों पर जनता का पैसा खर्च होता है। ऐसे में यदि सड़कों, गलियों और आरसीसी निर्माण में गुणवत्ता से समझौता हुआ है तो यह सीधे-सीधे जनता के अधिकारों और सरकारी धन दोनों के साथ खिलवाड़ है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उंगली उठा रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी वास्तविकता जानने के लिए स्वतंत्र जांच कराने से पीछे क्यों हट रहे हैं?
सच सबके सामने आना जरूरी
आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला किसी बयान या सफाई से नहीं बल्कि निष्पक्ष तकनीकी जांच से ही हो सकता है। यदि विकास कार्य मानकों के अनुरूप हुए हैं तो जांच से संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की छवि साफ होगी। लेकिन यदि अनियमितताएं मिलीं तो दोषियों पर कार्रवाई होना भी उतना ही जरूरी है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है लोनी नगरपालिका में विकास कार्यों की हकीकत क्या है? घटिया निर्माण सामग्री का सच, या फिर शिकायतों को दबाकर चहेतों को बचाने की कोशिश?
जनता अब जवाब चाहती है और जवाब का एकमात्र रास्ता है निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध विकास कार्यों की तकनीकी जांच। जब तक जांच नहीं होगी, तब तक आरोपों की गूंज और भ्रष्टाचार की चर्चाएं थमने वाली नहीं हैं।


