गाजियाबाद
नेशनल प्रेस टाइम्स की खबर की पुष्टि 14 तारीख में प्रकाशित खबर लोनी में तिरंगा यात्रा में भीड़ के दावे पर उठे सवाल
लोनी की तिरंगा यात्रा पर उठे सवाल: भाजपा की भीड़ या नगरपालिका का सरकारी अमला?
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : भाजपा विधायक और प्रदेश सरकार के मंत्री ए.के. शर्मा की देखरेख में खन्ना नगर मेन रोड से रामफल वाटिका तक निकाली गई तिरंगा यात्रा अब राजनीतिक चर्चा के साथ-साथ सरकारी अमले की कथित भागीदारी को लेकर भी सवालों के घेरे में आ गई है। यात्रा के आयोजन को लेकर नेशनल प्रेस टाइम्स ने अपनी खबर में दावा किया था कि भीड़ बढ़ाने के उद्देश्य से नगरपालिका के कर्मचारियों को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया। इसके बाद अब यह मुद्दा स्थानीय राजनीति में और गरमा गया है।
तिरंगा यात्रा के दौरान नगरपालिका के सफाई कर्मचारियों, ट्यूबवेल ऑपरेटरों, चौकीदारों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के शामिल होने को लेकर क्षेत्र में लगातार सवाल उठ रहे हैं। चर्चा इस बात की है कि ये कर्मचारी अपने नियमित सरकारी कार्य छोड़कर यात्रा में किसके निर्देश पर पहुंचे थे? क्या वे स्वेच्छा से कार्यक्रम में शामिल हुए थे या फिर उन पर अधिकारियों की ओर से किसी प्रकार का दबाव बनाया गया था? यदि सरकारी कर्मचारियों को किसी राजनीतिक कार्यक्रम में भीड़ बढ़ाने के लिए लगाया गया, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है यह भी जांच का विषय बन गया है।
पूर्व चेयरमैन मनोज धामा की पोस्ट से बढ़ी चर्चा
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब लोनी के पूर्व चेयरमैन मनोज धामा ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से तिरंगा यात्रा में नगरपालिका कर्मचारियों की कथित मौजूदगी का मुद्दा उठाया। उन्होंने अपनी पोस्ट में कर्मचारियों के कुछ फोटो भी साझा किए। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी इस बात को लेकर बहस शुरू हो गई कि आखिर नगरपालिका के कर्मचारी किस हैसियत से भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रम में दिखाई दे रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि पार्टी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कार्यक्रम में 10 हजार लोगों के शामिल होने के दावे के बावजूद इस कार्यक्रम में भीड़ बढ़ाने के लिए सरकारी कर्मचारियों की जरूरत क्यों पड़ी?
राजनीतिक रूप से सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि लोनी को भाजपा का मजबूत क्षेत्र माना जाता है और पार्टी के स्थानीय नेताओं की ओर से यहां बड़ी संख्या में सक्रिय कार्यकर्ताओं का दावा किया जाता रहा है। ऐसे में यदि पार्टी के पास पर्याप्त कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद हैं, तो तिरंगा यात्रा में भीड़ जुटाने के लिए नगरपालिका के कर्मचारियों की कथित जरूरत क्यों पड़ी?
यदि यात्रा वास्तव में पूरी तरह संगठनात्मक ताकत के आधार पर सफल हुई, तो सरकारी कर्मचारियों की मौजूदगी को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए। वहीं यदि कर्मचारी किसी अधिकारी के निर्देश पर कार्यक्रम में पहुंचे थे, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उन्हें किसने निर्देशित किया और क्या उन्हें अपने मूल दायित्वों से मुक्त किया गया था।
नगरपालिका के अधिकारियों की सक्रियता भी चर्चा में
यात्रा के दौरान नगरपालिका के अधिकांश अधिकारियों के सक्रिय रहने की चर्चा भी स्थानीय स्तर पर होती रही। आरोप लगाए जा रहे हैं कि नगरपालिका का अमला यात्रा को सफल बनाने में पूरी ताकत से जुटा रहा था। ऐसे में आम लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कार्यक्रम का आयोजन राजनीतिक संगठन भाजपा की ओर से था या फिर नगरपालिका परिषद लोनी भी किसी रूप में इसकी व्यवस्था का हिस्सा थी?
हालांकि इन आरोपों और सवालों पर संबंधित अधिकारियों तथा आयोजकों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है
भाजपा की साख बनाम कार्यकर्ताओं की दूरी
तिरंगा यात्रा देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के संदेश के लिए आयोजित की गई थी, लेकिन अब राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा कार्यक्रम के मूल उद्देश्य से हटकर भीड़ जुटाने के तरीके को लेकर होने लगी है। सवाल यह भी है कि यदि भाजपा का संगठन लोनी में मजबूत है तो पार्टी कार्यकर्ताओं की अपेक्षित संख्या कार्यक्रम में क्यों नहीं दिखाई दी?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक किसी भी राजनीतिक दल की वास्तविक ताकत उसके कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता के बीच उसकी पकड़ से तय होती है। ऐसे में यदि किसी कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं के बजाय सरकारी विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी अधिक चर्चा का विषय बन जाए, तो यह संगठन के लिए निश्चित रूप से असहज स्थिति मानी जा सकती है।
अब आयोजकों से इसके जवाब की उम्मीद
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि नगरपालिका के कर्मचारी तिरंगा यात्रा में किसके निर्देश पर पहुंचे? क्या उन्हें किसी आधिकारिक आदेश के तहत वहां भेजा गया था, या उन्होंने व्यक्तिगत इच्छा से कार्यक्रम में भाग लिया? यदि उन्हें ड्यूटी छोड़कर कार्यक्रम में शामिल होना पड़ा, तो उस दौरान उनकी सरकारी जिम्मेदारियों का निर्वहन किसने किया?
इन सवालों का जवाब भाजपा नेतृत्व, नगरपालिका प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के स्पष्ट बयान से ही सामने आ सकता है। फिलहाल तिरंगा यात्रा की सफलता के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों की कथित भागीदारी भी लोनी की राजनीति में चर्चा का नया विषय बन गई है। अब देखना यह है कि भाजपा इस मामले में सफाई देती है या नगरपालिका प्रशासन पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट करता है।



