बरेली
जिला अस्पताल परिसर में ही बने आयुर्वेदिक कॉलेज का नया भवन

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। शहर के बीच स्थित जिला अस्पताल परिसर में ही बहुमंजिला भवन बनाकर बांसमंडी के जर्जर राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज को शिफ्ट किया जाए। यह सुझाव वरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में दिया है।
सक्सेना ने बताया कि जिला अस्पताल दो भागों में बंटा है और दोनों तरफ खाली भूमि पड़ी है। सपा सरकार में बने महिला अस्पताल की तर्ज पर बहुमंजिला भवन बनाकर जिला परिषद वाली साइड में आयुर्वेदिक कॉलेज और दूसरी साइड में जिला अस्पताल के जर्जर भवनों को शिफ्ट किया जा सकता है। इससे जनता को एक ही छत के नीचे सभी सरकारी चिकित्सा सुविधाएं मिल जाएंगी। इस संबंध में लखनऊ से जर्जर भवनों को तोड़ने और नया साइट प्लान भेजने का पत्र भी आ चुका है, जिसे चिकित्सा अधीक्षक ने मूल्यांकन के लिए लोक निर्माण विभाग को भेजा है। बांसमंडी स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज का भवन 15 साल पहले ही जर्जर घोषित हो चुका है। कॉलेज में करीब 300 छात्र, 170 कर्मचारी, 40 शिक्षक हैं और रोजाना सैकड़ों मरीज ओपीडी में आते हैं। पिछले साल छात्रावास का छज्जा गिरने के बाद एनसीआईएसएम ने सीटें भी कम कर दी थीं। कॉलेज का नया भवन बनाने के लिए शासन आर्थिक रूप से तैयार है, लेकिन भूमि न मिलने से मामला अटका है। प्रेमनगर स्थित पुराने धर्मादत्त वैद्य अस्पताल की भूमि नगर निगम द्वारा खाली कराई जा चुकी है, जिसका उपयोग भी किया जा सकता है।
सक्सेना ने बताया कि इस मुद्दे को बिथरी चैनपुर विधायक डॉ. राघवेंद्र शर्मा विधानसभा में उठा चुके हैं, जबकि कैंट विधायक संजीव अग्रवाल और सांसद छत्रपाल गंगवार को भी पत्र भेजा गया है। उन्होंने मांग की कि जिला अस्पताल परिसर में टीबी अस्पताल से सटे जर्जर भवनों को तोड़कर वहां मल्टीस्टोरी भवन बनाया जाए, जिसमें आयुर्वेदिक कॉलेज, कार्यालय, आवास और दुकानों के लिए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भी हो। साथ ही परिसर में लगी महाराणा प्रताप की मूर्ति स्थल को पार्क के रूप में विकसित किया जाए और यू-शेप में आने-जाने का मार्ग बनाकर एंबुलेंस जाम की समस्या खत्म की जाए।
उन्होंने कहा कि बरेली भाजपा का गढ़ होने के बावजूद सरकारी चिकित्सा सुविधा में पिछड़ा है। यहां न सरकारी मेडिकल कॉलेज है, न ही 300 बेड अस्पताल पूरी क्षमता से चल रहा है। हजियापुर में बना यूनानी कॉलेज और सीबी गंज में निर्माणाधीन ईएसआई अस्पताल भी अधूरे पड़े हैं।



