गाजियाबाद

लोनी में विधानसभा चुनाव की हलचल तेज, सोशल मीडिया पर दावेदारों की ‘दावेदारी’ शुरू

भाजपा से टिकट के दावों की भरमार, तीज की भीड़ से मनोज धामा के चुनावी संकेत; गठबंधन में सीट बंटवारे पर टिकी सभी की निगाहें

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही लोनी की सियासत में गतिविधियां दिन प्रतिदिन तेज होती दिखाई देने लगी हैं। विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों के संभावित दावेदारों और उनके समर्थकों ने अपने-अपने नेताओं को मजबूत साबित करने की कवायद सोशल मीडिया पर अपने अपने तरीके से शुरू कर दी है। सोशल मीडिया इस राजनीतिक जंग का सबसे बड़ा मंच बनकर उभरा है, जहां समर्थक अपने पसंदीदा नेताओं के पक्ष में पोस्ट और दावे करते हुए दूसरे संभावित प्रत्याशियों को कमजोर बताने में जुटे हैं।
खास तौर पर भाजपा में टिकट को लेकर संभावित दावेदारों के समर्थकों के बीच प्रतिस्पर्धा साफ दिखाई दे रही है। अलग-अलग खेमों की ओर से अपने नेता के पक्ष में माहौल बनाने के साथ यह दावा भी किया जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी का टिकट उनके पसंदीदा नेता को ही मिलेगा। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है, लेकिन समर्थकों की सक्रियता ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि टिकट की दौड़ को लेकर अंदरखाने हलचल शुरू हो चुकी है।
सोशल मीडिया बना शक्ति प्रदर्शन का नया मैदान
लोनी की राजनीति में सोशल मीडिया पोस्ट अब केवल प्रचार का माध्यम नहीं रह गई हैं, बल्कि संभावित राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी बनती जा रही हैं। किसी नेता के कार्यक्रम में जुटी भीड़ को उनकी लोकप्रियता का प्रमाण बताया जा रहा है तो किसी आयोजन में नेताओं की मौजूदगी को टिकट की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
समर्थकों के अपने-अपने तर्क हैं। कोई संगठन में पकड़ को मजबूत आधार बता रहा है तो कोई जनता के बीच सक्रियता और जनसमर्थन को टिकट का पैमाना मान रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
तीज के कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ ने बढ़ाया मनोज धामा का उत्साह
इसी राजनीतिक परिदृश्य के बीच राष्ट्रीय लोकदल के पूर्व चेयरमैन मनोज धामा के तीज कार्यक्रम में महिलाओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने लोनी की चुनावी चर्चाओं को नया विषय दे दिया है। कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ को मनोज धामा के समर्थक उनके मजबूत जनाधार के संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
समर्थकों के बीच उत्साह का आलम यह रहा कि कार्यक्रम की भीड़ को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। मनोज धामा भी इस जनसमर्थन से उत्साहित नजर आए और अपनी राजनीतिक इच्छा को छिपा नहीं सके। उन्होंने कहा कि यदि जनता का यही विश्वास और प्यार आगे भी कायम रहा तो वह आगामी विधानसभा चुनाव में जरूर ताल ठोकेंगे।
मनोज धामा का यह बयान राजनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे लोनी में राष्ट्रीय लोकदल की ओर से संभावित दावेदारी को लेकर चर्चाओं को बल मिला है।
भाजपा-रालोद गठबंधन ने बढ़ाई सियासी गणित की दिलचस्पी
लोनी की चुनावी राजनीति में सबसे दिलचस्प पहलू भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन है। दोनों दल प्रदेश की राजनीति में गठबंधन के साथी हैं, लेकिन लोनी में दोनों खेमों से संभावित प्रत्याशियों के चुनावी मैदान में उतरने की चर्चाएं सियासी गणित को पेचीदा बना रही हैं।
एक ओर भाजपा समर्थक अपने-अपने नेताओं को टिकट मिलने के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रालोद से मनोज धामा की संभावित दावेदारी की चर्चा जोर पकड़ रही है। ऐसे में असली सवाल प्रत्याशियों की ताकत से ज्यादा गठबंधन में लोनी विधानसभा सीट किस दल के खाते में जाती है, इस पर टिक गया है।
भीड़ ही टिकट का पैमाना या संगठन का फैसला निर्णायक?
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में किसी कार्यक्रम में उमड़ने वाली भीड़ निश्चित रूप से नेता की राजनीतिक सक्रियता और जनसंपर्क का संकेत हो सकती है, लेकिन चुनावी टिकट का फैसला केवल भीड़ के आधार पर नहीं होता। पार्टी का संगठन, नेतृत्व का भरोसा, जातीय एवं सामाजिक समीकरण, पिछले चुनावों का प्रदर्शन, स्थानीय स्वीकार्यता और जीत की संभावनाएं जैसे कई पहलू टिकट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यही वजह है कि फिलहाल सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को राजनीतिक माहौल बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। वास्तविक तस्वीर गठबंधन की सीट शेयरिंग और संबंधित दलों के शीर्ष नेतृत्व के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
लोनी में ‘टिकट से पहले टिकट की लड़ाई’
कुल मिलाकर लोनी में विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही ‘टिकट से पहले टिकट की लड़ाई’ शुरू होती नजर आ रही है। भाजपा में कई दावेदारों के समर्थक अपने-अपने नेताओं को सबसे मजबूत बताने में जुटे हैं, जबकि रालोद खेमे में मनोज धामा के संभावित चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा ने समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है।
अब निगाहें दो सवालों पर टिकी हैं—गठबंधन में लोनी सीट भाजपा के हिस्से आएगी या राष्ट्रीय लोकदल के खाते में जाएगी? और यदि सीट भाजपा के पास जाती है तो पार्टी किस चेहरे पर दांव लगाएगी?
फिलहाल समर्थकों की पोस्ट, राजनीतिक कार्यक्रमों की भीड़ और नेताओं के बयान चुनावी पारा बढ़ाने में जुटे हैं। असली राजनीतिक तस्वीर सीट बंटवारे और टिकट की घोषणा के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना जरूर है कि लोनी में चुनावी बिसात पर मोहरे सजने शुरू हो गए हैं।
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