बिजनौर एसपी का बड़ा एक्शन बीस नेताओं के गनर हटाए

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बिजनौर : पुलिस कप्तान केके बिश्नोई ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए 20 नेताओं की सुरक्षा में तैनात गनरों को हटाने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है। कि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया है।
एसपी केके बिश्नोई ने 22 अगस्त 2026 को बिजनौर एसपी का पद संभाला था और तब से पुलिसिंग को लेकर कई सख्त फैसले सामने आ चुके हैं। बिजनौर में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव से सियासी हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। लेकिन
एसपी बोले – सुरक्षा प्रतिष्ठा नहीं, जरूरत है।
एसपी केके बिश्नोई ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा के बाद अनावश्यक रूप से तैनात सुरक्षाकर्मियों को हटाया गया है। सुरक्षा किसी की प्रतिष्ठा का पैमाना नहीं है, बल्कि वास्तविक खतरे के आकलन के आधार पर ही दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय और परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा आगे भी जारी रहेगी और जरूरत के मुताबिक बदलाव किए जाएंगे। लेकिन गनर गया तो रुतबा भी गया !
20 से अधिक नेताओं की सुरक्षा में कटौती, सरकारी गनर वापस; अब नेताओं के साथ नहीं, जनता की सुरक्षा में दौड़ेंगे पुलिसकर्मी। एसपी के इस फैसले का सबसे बड़ा संदेश यही माना जा रहा है।कि सरकारी गनर अब किसी के रुतबे, राजनीतिक पहचान या सामाजिक दिखावे का प्रतीक नहीं रहेगा। सुरक्षा उसी को मिलेगी, जिसे वास्तविक खतरा होगा। जिसमें धामपुर क्षेत्र में सबसे ज्यादा चर्चा है। यहां तीन सत्ताधारी नेताओं और एक पूर्व विधायक की सुरक्षा में कटौती किए जाने की बात सामने आई है। कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन ने साफ संदेश दिया है। कि सुरक्षा का फैसला किसी के राजनीतिक प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि खतरे के आकलन के आधार पर होगा लेकिन वापस लिए गए पुलिसकर्मियों को अब थानों, चौकियों, गश्त और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में लगाया जाएगा। इससे पुलिस बल की कमी से जूझ रहे थानों को अतिरिक्त नफरी मिल सकती है और पुलिस की मौजूदगी आम जनता के बीच बढ़ेगी। लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि कुछ प्रभावशाली लोग वास्तविक खतरे से ज्यादा अपनी राजनीतिक हैसियत और रसूख के प्रदर्शन के लिए सरकारी सुरक्षा को प्रतिष्ठा से जोड़कर देखते है। तो इस कार्रवाई की खास बात यह है कि इसमें सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं की सुरक्षा भी समीक्षा के दायरे में आई है। इससे पुलिस प्रशासन की ओर से यह संदेश देने की कोशिश साफ दिखाई देती है कि सुरक्षा के मामले में राजनीतिक पहचान को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी
एसपी केके बिश्नोई का यह कदम बेसिक पुलिसिंग को प्राथमिकता देने वाली कार्रवाई है। अब देखना होगा कि सुरक्षा से मुक्त हुए पुलिसकर्मी जब सड़कों पर गश्त करेंगे,और थानों में तैनात होंगे
