गाजियाबाद
रेड फ्लेम प्रकरण के बाद लोनी में पंचायतों का दौर
अलग-अलग पंचायतों में सामने आए विरोध और समर्थन के सुर, वायरल वीडियो को लेकर भी सियासी चर्चा तेज

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : गाजियाबाद के लोनी नंबर-2 बस स्टैंड के निकट स्थित रेड फ्लेम रेस्टोरेंट में शनिवार शाम हुई कथित बदसलूकी और मारपीट की घटना के बाद क्षेत्र की राजनीति में उबाल बढ़ता जा रहा है। मामले को लेकर अब आरोप-प्रत्यारोप के साथ साथ अब पंचायतों का दौर भी शुरू हो गया है। मंगलवार को अलग-अलग स्थानों पर गुर्जर समाज की पंचायतें आयोजित हुईं, जिनमें एक ओर भाजपा नेता ईश्वर मावी के समर्थन में आवाज उठी तो दूसरी ओर स्थानीय विधायक के समर्थन में ग्रामीण जुटते नजर आए।
गांव टीला में भाजपा नेता ईश्वर मावी के समर्थन में आयोजित पंचायत में उन्होंने अपने साथ हुई कथित अभद्रता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बहन-बेटियां सभी की होती हैं और महिलाओं के प्रति अपशब्दों का प्रयोग किसी भी व्यक्ति को शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की भाषा को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता और अब इस मामले में चुप नहीं बैठा जाएगा।
ईश्वर मावी ने कहा कि उनकी राजनीति विकास के मुद्दों पर केंद्रित रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधि के विकास संबंधी दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोनी में कितना विकास हुआ है, इसका आकलन क्षेत्र की जनता स्वयं कर रही है।
निठौरा में विधायक के समर्थन में पंचायत
वहीं ग्राम निठौरा में आयोजित दूसरी पंचायत में मौजूद लोगों ने स्थानीय विधायक के समर्थन में अपना पक्ष रखा। पंचायत में कुछ ग्रामीणों और नेताओं ने आरोप लगाया कि रेड फ्लेम की घटना को कथित तौर पर पूर्व नियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसका उद्देश्य लोनी के सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित करना था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पंचायत में वक्ताओं ने कहा कि लोनी का लंबे समय से आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल का इतिहास रहा है। किसी भी विवाद को राजनीतिक या सामाजिक टकराव का रूप देने के बजाय तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि क्षेत्र का माहौल खराब न हो।
महिलाओं के सम्मान का मुद्दा बना राजनीतिक बहस
रेड फ्लेम प्रकरण से जुड़े कथित वायरल वीडियो को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। पंचायत में मौजूद लोगों ने महिलाओं के प्रति कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इसका राजनीतिक नुकसान भाजपा को भी उठाना पड़ सकता है।
वक्ताओं का कहना था कि एक ओर भाजपा महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पार्टी से जुड़े किसी जनप्रतिनिधि पर महिलाओं के प्रति अभद्र भाषा के इस्तेमाल के आरोप लगना पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। उनका दावा है कि यदि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप सही पाए जाते हैं तो इसका प्रभाव लोनी से बाहर भी पार्टी की राजनीतिक छवि पर पड़ सकता है। गांव के युवकों इस तरह की भाषा का प्रयोग होने पर आक्रोश व्याप्त है उन्होंने भविष्य में इसका बदला मतदान के रुप में लेने की बात कही है
पंचायतों से बढ़ी सियासी गर्मी, अब निगाह पुलिस कार्रवाई पर
रेड फ्लेम प्रकरण अब केवल एक स्थानीय विवाद तक सीमित न रहकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ भाजपा नेता के समर्थन में पंचायत, दूसरी ओर विधायक के पक्ष में ग्रामीणों की लामबंदी ने लोनी की सियासत को और गरमा दिया है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कब तक पूरी होती है और सामने आए वीडियो तथा लगाए जा रहे आरोपों की पुलिस जांच में क्या सच्चाई सामने आती है। क्षेत्र के लोगों की नजर अब पुलिस की कार्रवाई और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।


