रांची

डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी गवर्नेंस को लेकर विभागीय कार्यशाला आयोजित

Departmental workshop held on data security and privacy governance.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।

रांची। नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट भवन, धुर्वा स्थित न्यू ऑडिटोरियम में “डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 एवं डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स, 2025” विषय पर विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन सी-डैक, कोलकाता द्वारा झारखंड सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग के समन्वय से आयोजित की गई। कार्यशाला को संबोधित करते हुए आईटी निदेशक सुश्री माधवी मिश्रा ने कहा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट का मूल उद्देश्य नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि नागरिक सरकार पर भरोसा कर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करते हैं और इस विश्वास की रक्षा करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार के साथ डेटा सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़ी नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अधिकारियों को डेटा सुरक्षा, प्राइवेसी और कानूनी अनुपालन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से सरकारी तंत्र की क्षमता मजबूत होने के साथ नागरिकों का विश्वास भी सुदृढ़ होगा। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक पदाधिकारी और आईटी विशेषज्ञ शामिल हुए। इसका उद्देश्य अधिकारियों को डीपीडीपी एक्ट, 2023 के प्रमुख प्रावधानों, दायित्वों और अनुपालन प्रक्रिया से अवगत कराना था, ताकि सरकारी सेवाओं में डेटा सुरक्षा एवं प्राइवेसी गवर्नेंस को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। विशेषज्ञ वक्ताओं ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा सुरक्षा की बढ़ती जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े कानूनी पहलुओं, नागरिकों के अधिकारों तथा Data Fiduciary की जवाबदेही की जानकारी दी। साथ ही साइबर जोखिमों और संभावित डेटा उल्लंघनों से उत्पन्न चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। कार्यशाला में केस स्टडी, प्रेजेंटेशन और इंटरएक्टिव सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी दी गई। अधिकारियों को साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत करने, व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता बनाए रखने और डेटा उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी गई। इस अवसर पर सी-डैक के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री मृण्मय दास तथा हैदराबाद से जुड़े एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. चास मूर्ति ने डेटा पॉलिसी एवं प्राइवेसी गवर्नेंस के विभिन्न आयामों पर विचार साझा किए। वहीं, MeitY के पूर्व जीसी साइबर लॉ डॉ. संदीप चटर्जी ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला में शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ डेटा सुरक्षा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। सरकारी विभागों को पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा सुरक्षा के उच्च मानकों को अपनाते हुए नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। कार्यशाला में डीपीडीपी अधिनियम, 2023 एवं नियम, 2025 के प्रमुख प्रावधान, Data Fiduciary के दायित्व एवं Data Principal के अधिकार, Consent Management एवं कानूनी प्रक्रिया, शिकायत निवारण एवं Data Breach से जुड़े प्रावधान Privacy by Design एवं इसके क्रियान्वयन के व्यावहारिक तरीके जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए डेटा सुरक्षा एवं प्राइवेसी से जुड़े विषयों पर नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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Nurul Islam

PRABHARI (MANDAL)

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