बालाघाट
36 से अधिक बैगा बच्चों की मौत के बीच पाथरी के आमाटोला में पोषण आहार का इंतजार
ग्रामीणों का आरोप—कुछ दिनों तक ही मिला पोषण आहार, गांव में आंगनबाड़ी और सड़क-पुलिया की भी कमी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट/बैहर। जिले के बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। 36 से अधिक बैगा आदिवासी बच्चों की मौत के मामले के बीच दक्षिण बैहर क्षेत्र की ग्राम पंचायत पाथरी के आमाटोला में बच्चों को नियमित पोषण आहार नहीं मिलने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन की योजनाओं का लाभ गांव तक नियमित रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार आमाटोला में बैगा समुदाय के करीब 30 से 35 परिवार निवास करते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि गांव में लगभग 30 से 40 छोटे बच्चे हैं, जिन्हें नियमित पोषण आहार उपलब्ध नहीं हो रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ दिन पहले अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में दौरे के दौरान करीब 15 दिनों तक बच्चों को पोषण आहार दिया गया, लेकिन इसके बाद नियमित व्यवस्था फिर प्रभावित हो गई।
गांव में आंगनबाड़ी नहीं होने की शिकायत
ग्रामीणों का कहना है कि आमाटोला में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं होने के कारण बच्चों को पोषण सेवाओं का नियमित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि यदि गांव में ही आंगनबाड़ी केंद्र और नियमित पोषण व्यवस्था होती तो बच्चों को आवश्यक पोषण आहार आसानी से उपलब्ध हो सकता था।
ग्रामीणों ने रोजगार की समस्या का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर पर्याप्त काम नहीं मिलने के कारण कई परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं और भोजन के रूप में मुख्य रूप से भात-चटनी पर निर्भर हैं।
सड़क और पुलिया का भी अभाव
ग्रामीणों के अनुसार आमाटोला तक आज भी बेहतर सड़क और पुलिया की सुविधा नहीं है। बारिश के दौरान पथरीले रास्तों और नालों के कारण आवागमन और अधिक कठिन हो जाता है। ऐसे में बच्चों को दूसरे स्थान पर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक नियमित रूप से ले जाना ग्रामीणों के लिए चुनौतीपूर्ण है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि आंगनबाड़ी केंद्र गांव से दूर है और रास्ते भी सुगम नहीं हैं, तो बच्चों तक नियमित पोषण आहार और अन्य बाल विकास सेवाएं किस तरह पहुंचेंगी।
दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर का सवाल
ग्रामीणों की शिकायत ऐसे समय सामने आई है, जब पिछले कुछ महीनों से बैहर क्षेत्र में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के दौरे हो रहे हैं और प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को लेकर विभिन्न प्रयासों की जानकारी दी जा रही है। ऐसे में आमाटोला की स्थिति सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है।
हालांकि, पोषण आहार वितरण में अनियमितता और अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभाग के रिकॉर्ड और अधिकारियों के पक्ष से किया जाना आवश्यक है। अब देखने वाली बात यह होगी कि महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला प्रशासन आमाटोला में बच्चों की वास्तविक संख्या, पोषण आहार वितरण, आंगनबाड़ी सुविधा और सड़क-पुलिया की स्थिति का परीक्षण कर क्या कदम उठाता है।




