बेतुल
बैतूल भारतीय शिक्षण मंडल ने किया व्यास पूजन
भगवान ने स्वयं व्यास के रूप में अवतार लेकर वेदों का विस्तार किया

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। भारतीय शिक्षण मण्डल के तत्वावधान में गुरु-पूर्णिमा के पावन पर्व पर व्यास पूजन किया गया। कार्यक्रम बैतूल के पांच महाविद्यालयों, एक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था तथा तेरह विद्यालयों में किया गया। आयोजित कार्यक्रमों में प्रबुद्ध वक्ताओं द्वारा अपने उद्बोधन में भारतीय शिक्षण मण्डल के उद्देश्य और कार्यप्रणाली से अवगत कराते हुए भारतीय ज्ञान- परम्परा, भारतीय संस्कृति, वसुधैव कुटुम्बकम, भारत की वैश्विक जीवन-दृष्टि, नैतिक मूल्य, राष्ट्रीय मूल्य, शिक्षा की भारतीय गुरुकुल पद्धति और वर्तमान शिक्षा में आधुनिक कौशल के समावेश पर विचार रखे। इस मौके पर मंडल के संयोजक डॉ.मलखान सिंह चौहान ने कहा कि व्यास का अर्थ है संपादक। यह उपाधि अनेक पुराने ग्रन्थकारों को प्रदान की गयी है, किन्तु विशेषकर वेदव्यास उपाधि वेदों को व्यवस्थित रूप प्रदान करने वाले उन महर्षि को दी गयी है जो चिरंजीव हैं। यही नाम महाभारत के संकलनकर्ता, वेदान्तदर्शन के स्थापनकर्ता तथा पुराणों के व्यवस्थापक को भी दिया गया है। वेदों का विस्तार करने के कारण ये वेदव्यास तथा बदरीवन में निवास करने कारण बादरायण भी कहे जाते हैं। इन्होंने वेदों के विस्तार के साथ महाभारत, अठारह महापुराणों तथा बह्मसूत्र का भी प्रणयन किया। शास्त्रों की ऐसी मान्यता है कि भगवान ने स्वयं व्यास के रूप में अवतार लेकर वेदों का विस्तार किया। वक्तव्य में हेमराज सिंह राठौर, राजीव खंडेलवाल, डॉ.केशवानंद साहू, नरेश लहरपुर, धनीराम गढ़ेकर, सुरेन्द्रसिंह राठौर, डॉ.देवराव वागद्रे, लक्ष्मणराव माथनकर, मुक्ता ढोलेकर, डॉ.अलका पाण्डेय, पालीवाल गुरुजी, हेमंत सिंह चौहान, नरेन्द्र प्रसाद, श्यामजी सूर्यवंशी, अनिल दुबे में आदि वक्ताओं ने सराहनीय योगदान दिया।



