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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक

  गैंगस्टर छोटा राजन की जमानत रद्द

 

मुबंई। राजन ने इस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की थी। 23 अक्टूबर, 2024 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसकी सजा निलंबित कर दी और उसे जमानत दे दी। हालाँकि, सीबीआई ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसने अब हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में 2001 के जया शेट्टी हत्याकांड में गैंगस्टर छोटा राजन की बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत रद्द कर दी है। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा, “अगर उसे चार मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है, तो इस मामले में उसकी सजा निलंबित क्यों रहनी चाहिए?” यह मामला 2001 में होटल व्यवसायी जया शेट्टी की हत्या से जुड़ा है। एक विशेष अदालत ने पिछले साल मई में छोटा राजन को दोषी ठहराया था और अपराध में शामिल होने के लिए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। राजन ने इस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की थी। 23 अक्टूबर, 2024 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसकी सजा निलंबित कर दी और उसे जमानत दे दी। हालाँकि, सीबीआई ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसने अब हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया है।

राजन के वकील ने दलील दी कि 71 में से 47 मामलों में सीबीआई को उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। चूँकि छोटा राजन पहले से ही अन्य मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है, इसलिए अदालत ने स्पष्ट किया कि उसे फिर से आत्मसमर्पण करने की आवश्यकता नहीं है।

हत्या से पहले जबरन वसूली की धमकियाँ

अभियोजन पक्ष के अनुसार, दक्षिण मुंबई स्थित गोल्डन क्राउन होटल की मालकिन, पीड़िता जया शेट्टी को छोटा राजन के गिरोह से जबरन वसूली की धमकियाँ मिल रही थीं। हालाँकि शेट्टी को पुलिस सुरक्षा दी गई थी, लेकिन हत्या से दो महीने पहले इसे वापस ले लिया गया था। 4 मई, 2001 को, शेट्टी की उनके कार्यालय के बाहर गिरोह के दो कथित सदस्यों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर 50,000 रुपये की मांग पूरी करने से इनकार कर दिया था।

2024 में विशेष मकोका अदालत का फैसला

मई 2024 में मुंबई की एक विशेष मकोका अदालत ने हत्या में उसकी भूमिका के लिए छोटा राजन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उसे कई आरोपों में दोषी ठहराया गया: धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत, राजन को आजीवन कारावास और 1,00,000 रुपये के जुमार्ने की सजा सुनाई गई। जुमार्ना न भरने पर एक साल का साधारण कारावास और होगा। धारा 3(1)(्र), 3(2), और 3(4) के तहत, उसे आजीवन कारावास और 5,00,000 रुपये के जुमार्ने की सजा सुनाई गई। इन जुमार्ने की अदायगी न करने पर प्रत्येक मामले में एक साल का अतिरिक्त साधारण कारावास होगा।

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