सिंगरौली

पोषण आहार डकार रिकॉर्ड पर पूरा वितरण 

डीपीओ का कारनामा, कागजों में हुआ परिवहन एवं वितरण, महिलाओं को दिया जाना था पौष्टिक पोषण आहार...

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली । सिंगरौली जिले में अगर आप सोच रहे हैं कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार किस हद तक जा सकता है, तो जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के डीपीओ जितेन्द्र कुमार गुप्ता के कारनामों को देखिए। यहां  सुपरहिट योजना के तहत पोषण आहार का वितरण दो महीने से डकार लिया गया, लेकिन कागजों पर ऐसा दिखाया गया जैसे हर आंगनबाड़ी केंद्रों तथा किशोर बच्चों व गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तक पूरा वितरण हो चुका हो। जिले में करीब 1550 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, लेकिन सितंबर और अक्टूबर  माह का पोषण आहार किशोर बच्चों एवं  गर्भवती, धात्री महिलाओं तक पहुँचने की बजाय कहीं खो गया। पोषण आहार का परिवहन करने वाले ठेकेदार का दो महीने से टेंडर खतम हो चुका है, लेकिन अधिकारी बड़ी ही शातिराना चालाकी से कागजों पर रिकॉर्ड पूरा कर देते हैं। इससे ऐसा लगता है कि विभाग कामकाज में अग्रणी है,  लेकिन असलियत में गरीब और कमजोर परिवारों की भूख और जरूरतों की कोई परवाह नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर पोषण ट्रेकर ऐप ऑनलाइन रिपोर्ट बनाने का दबाव डाला जाता है। वे मजबूरी में कार्य करती हैं और रिकॉर्ड तैयार करते हैं, जबकि असल में वितरण कहीं नहीं हुआ। किशोर बच्चों व गर्भवती, धात्री महिलाओं को उनके हक का सहायक पोषण आहार नहीं मिला और बच्चे खाली पेट रह गए। सूत्रों के अनुसार डीपीओ जितेन्द्र कुमार और उनके करीबी अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल चलता रहा है। कागजों में पूरा वितरण दिखाकर वह  कार्यक्षमता का झांसा देते हैं। पिछले वर्ष के चर्चित डीपीओ के भ्रष्टाचार भी याद आए तो लगता है कि सिंगरौली में यह परंपरा अब नए डीपीओ के हाथों और परिष्कृत हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गंभीर मामला सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। पोषण आहार कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और गर्भवती माताओं को स्वस्थ आहार उपलब्ध कराना था, लेकिन भ्रष्टाचार और कागजों की चालाकी ने इसे निष्फल बना दिया है। अब सवाल यह है कि प्रशासन कब तक  कागजों के वितरण पर आंख बंद किए बैठे रहेगा। दिशा की बैठक में विधायक ने उठाया था मुद्दा पिछले माह के अंतिम सप्ताह में कलेक्ट्ररेट सभागार में सांसद डॉ. राजेश मिश्रा की अध्यक्षता में दिशा की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में एक विधायक के द्वारा शिकायत किया गया कि आंगनवाड़ी केन्द्रों में कई महीने से पौष्टिक पोषण आहार का वितरण नही किया जा रहा है। इस दौरान कलेक्टर ने भी डीपीओ से सवाल किया कि जांच के दौरान इस तरह की शिकायते मुझे भी मिली हैं। डीपीओ ने गोलमाल जवाब दिया था। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि जब परिवहन ठेकेदार  का टेंडर समाप्त हो गया तो पोषण आहार का परिवहन रीवा से कैसे कराया गया । हालांकि इसका जवाब देने में डीपीओ को पसीने छूटने लगे।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर रहता है भारी दबाव कुछ आंनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि सितम्बर-अक्टूबर महीने का पौष्टिक आहार नही मिला है। यह समस्या सबसे ज्यादा ग्रामीण अंचलों है। सितम्बर महीने का एक भी पोषण आहार नही मिला है। अक्टूबर में आधा अधूरा  कुछ केन्द्रों को मिला है। वह भी पोषण कब का है, नही पता है। आगे कहा कि पोषण ट्रेकर ऐप में आंकड़ेबाजी देनी पड़ती है, इसके लिए परियोजना से भारी दबाव रहता है। हितग्राहियों को पोषण आहार वितरण के मिलने का मैसेज भी जाता है। कार्यकर्ताओं ने माना कि सब कुछ दबाव में कागजी घोड़ा दौड़ाया जा रहा है।
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