सिंगरौली
बलियरी में कबाड़ की आड़ में चल रहा ‘करमुल्ला साम्राज्य’
चोरी का माल खरीदने–बेचने में पुलिस भी ‘मूक गवाह’

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। जिले में चोरी के सामान और अवैध धातु कारोबार पर रोक लगाने की तमाम कोशिशें अब सिर्फ फाइलों के पन्नों में दबकर रह गई हैं। बैढ़न कोतवाली क्षेत्र के बलियरी इलाके में एक कुख्यात कबाड़ी करमुल्ला का साम्राज्य तेजी से फैल रहा है। यह न सिर्फ कबाड़ खरीदता है बल्कि खुलेआम तांबे की केविल और वाहनों के पार्ट जलाकर कीमती धातु निकालता है।
सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि रोज़ रात को यहां चोरी का माल आता है, जलाया जाता है, सुबह कबाड़ बनकर निकल जाता है और पुलिस की नाक के आगे से होकर जाता है। बलियरी के आसमान में रोज़ उठता धुआं अब वहां की पहचान बन चुका है। तांबे की केविल और प्लास्टिक के ढेर जलाने की यह प्रक्रिया खुलेआम चल रही है। स्थानीय लोग शिकायत करते-करते थक चुके हैं पर पुलिस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम तीनों विभागों की ‘एक जैसी खामोशी’ सवाल खड़े करती है। लगता है धुआं सिर्फ हवा में नहीं उड़ रहा, कुछ नोटों की खुशबू भी साथ उड़ा देता है।
कार्टून-लाइसेंस के नाम पर चल रहा धातु साम्राज्य
दिखाने को तो करमुल्ला के पास प्लास्टिक और कार्टून स्क्रैप का लाइसेंस है, लेकिन हकीकत में दुकान पर सरिया, लोहे, गाड़ियों के पार्ट्स, केविल और पीतल के ढेर लगे हैं। रात में चोरी के माल को जलाकर पहचान मिटाई जाती है ताकि सबूत ‘राख’ बन जाएं और केस फाइलों में ‘ठंडा’ हो जाए।
पुलिस की ‘नींद’ या ‘मिलीभगत’?
यहां असली सवाल यही उठता है कि क्या पुलिस को इस पूरे खेल की खबर नहीं? या फिर खबर तो है, लेकिन हिस्सेदारी भी तय है! क्योंकि जिस सड़क से रोज़ाना दर्जनों संदिग्ध गाड़ियां कबाड़ लेकर गुजरती हैं, वहीं से तो पुलिस की पेट्रोलिंग भी होती है।फिर भी कार्रवाई “शून्य” बटा सन्नाटा क्यों रहती है।
सूत्रों की मानें तो “कबाड़ी साहब” हर महीने कुछ “खास मुलाकातों” से अपनी व्यवस्था बनाए रखते हैं। यानि कि संरक्षण भी पक्का, कारोबार भी धड़ल्ले से।
चोरी में पुलिस की चुप्पी यह गठजोड़ बहुत कुछ कहता है! बीते महीनों में सिंगरौली में चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं शटर, सरिया, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, यहां तक कि ट्रांसफार्मर के तार तक गायब! लेकिन हर केस की फाइल वहीं जाकर थम जाती है, जहां करमुल्ला के दरवाज़े खुलते हैं। चर्चा होना जारी है कि जिसे पकड़ना था, जब वही संरक्षण दे रहा है तो ऐसे में अब अपराधी डरेंगे भी तो क्यों?
धुआं सिर्फ आसमान में नहीं, सिस्टम के भीतर भी है!
यह खेल सिर्फ पर्यावरण नहीं, कानून और प्रशासन की साख को भी जला रहा है। बलियरी के धुएं में सिर्फ तांबा नहीं, व्यवस्था की नैतिकता भी जल रही है। अब जनता पूछ भी रही है कि क्या करमुल्ला कबाड़ी के पास सिर्फ प्लास्टिक स्क्रैप का लाइसेंस है या धातु कारोबार की भी अनुमति है? क्या पुलिस ने कभी इस संदिग्ध जगह की वास्तविक जांच की है? क्या चोरी के बढ़ते मामलों में इसी कबाड़ी नेटवर्क का हाथ नहीं? क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम की चुप्पी भी ‘साझेदारी’ का संकेत नहीं देती? स्थानीय लोग कह रहे हैं कि अगर प्रशासन एक दिन की गंभीर कार्रवाई करे, तो करमुल्ला जैसे कबाड़ियों के यहां से करोड़ों रुपये के चोरी के सामान और अवैध धातु कारोबार का पूरा नेटवर्क सामने आ सकता है। सवाल वही है कि क्या अधिकारी तभी जागेंगे जब कोई बड़ा हादसा या खुलासा होगा? सिंगरौली जैसे औद्योगिक जिले में कबाड़ की आड़ में चल रहा यह खेल अब सबको दिख रहा है, बस देखने वाले अंधे बने हैं।




