बाराबंकी

पंचायत द्वारा स्थापित लाइब्रेरी की जो ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा

जागरूकता और आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख रही हैं

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

मसौली बाराबंकी। जब पंख मिले हौसलों को, तब बच्चों ने आसमान जीत लिया जी हम बात कर रहे है बड़ागांव के पंचायत भवन मे पंचायत द्वारा स्थापित लाइब्रेरी की जो  ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा, जागरूकता और आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख रही हैं। ये लाइब्रेरी न केवल ज्ञान का केंद्र बन गया हैं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के सपनों को पंख देने वाली ‘मिसाल’ के रूप में उभरी है
इस डिजिटल लाइब्रेरी मे हाई-स्पीड इंटरनेट, कंप्यूटर, यूपीएससी , एसएससी  रेलवे, पुलिस की तैयारी के लिए किताबें और संसाधन उपलब्ध है जिससे ग्रामीण छात्रों को शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती और वे गाँव में ही रहकर सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
 जिला मुख्यालय से 14 किमी दूर मसौली ब्लॉक के बड़ागांव की महिला ग्राम प्रधान नूरफातिमा स्वय तो कुछ ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है लेकिन उन्होंने सोचा कि उनके गांव के बच्चे उनके जैसे न बनें. लिहाजा ग्राम प्रधान बनने के बाद इन्होंने अपने गांव के बच्चों के लिए कुछ खास करने की ठानी. पति नूर मोहम्मद से मशवरा किया और तय हुआ कि गांव में एक लाइब्रेरी बनाई जाए, जिसमें बैठकर गांव के बच्चे तैयारी कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करें ये लाइब्रेरी केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर क्रियाशील हैं। इनमें जिला प्रशासन और पंचायत राज विभाग द्वारा नियमित निगरानी की जाती है। यह प्रयास ग्रामीण भारत में ‘डिजिटल डिवाइड’ को कम करने में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। करीब10 हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत  बड़ागांव के लड़के-लड़कियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहर आता-जाता देख प्रधान पति नूर मोहम्मद के मन में पहले से ही अपने गांव के इन लड़के लड़कियों के लिए कुछ करने का इरादा था. पत्नी की नेक ख्वाहिश ने उनके जज्बे को दुगुना कर दिया. शुरुआत में इन्होंने 8 बच्चों के पढ़ने के लिए गांव में बने पंचायत भवन के एक छोटे से कमरे में एक छोटी सी लाइब्रेरी कायम की. धीरे-धीरे जब बच्चे बढ़ने लगे तो इन्होंने इसका विस्तार कर डाला. अब इस लाइब्रेरी में 25 से ज्यादा बच्चे एक साथ बैठकर बड़े इत्मीनान से अपनी पढ़ाई कर रहे हैं।
    ( लाइब्रेरी में हैं ये सुविधाएं )
इस हाईटेक लाइब्रेरी में 2 कम्प्यूटर हैं, हर बच्चे के लिए अलग डेस्क और कुर्सी है. तमाम प्रतियोगी किताबें, मैगजीन्स हैं. इंटरनेट के ब्रॉड बैंड और वाईफाई कनेक्शन हैं. पेयजल के लिए लाइब्रेरी के बाहर वाटर कूलर लगा है. बाथरूम और टॉयलेट है. यानी किसी भी बच्चे को पढ़ाई के दौरान कोई दिक्कत न हो इसका हर इंतजाम है. इस लाइब्रेरी मे  प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र छात्रा न केवल बड़ागांव के बल्कि आसपास के तमाम गांवों के युवाओं की आंखों में चमक जाग गई और वे नियमित लाइब्रेरी आने लगे. लाइब्रेरी के शांतिपूर्ण माहौल में बैठकर उन्होने तैयारी शुरू कर दी और बच्चो को. अच्छा माहौल मिला तो कई बच्चों ने प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर 8 बच्चे सरकारी सेवा मे प्रतिभाग कर रहे है।
 : इस लाइब्रेरी मे करीब एक दर्जन ऐसे बच्चे है जो बड़ागांव, मसौली, चक, रामनगरा के रहने वाले है जो रात्रि 12 बजे तक पढ़ाई करते है और सुबह 4 बजे से पुनः पढ़ाई मे लग जाते है यह सभी बच्चे लाइब्रेरी मे ही सो जाते है इस लाइब्रेरी को लेकर गांव के लोगों में भी काफी उत्साह है. इनका कहना है कि पहले जहां उनके बच्चों को कम्पटीशन की तैयारी के लिए शहर जाना पड़ता था लेकिन अब उनको वो सारी सुविधाएं यहीं मिल जा रही हैं.।
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