बागपत

अंग प्रदर्शन नहीं, आत्मसम्मान और वीरता अपनाएं बेटियां: रवि शास्त्री

बहादुर वीरांगना बने नारी, संस्कारवान बने समाज

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बड़ौत/बागपत। आर्य प्रतिनिधि सभा बागपत द्वारा जून माह में चौधरी केहर सिंह पब्लिक स्कूल, बड़ौत में आयोजित होने वाले आवासीय संस्कार शिविर के व्यापक जनसंपर्क अभियान के अंतर्गत नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेमोरियल इंटर कॉलेज, तमेला गढ़ी में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सभा मंत्री रवि शास्त्री ने छात्राओं एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की बेटियां केवल आधुनिकता की अंधी दौड़ में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि रानी लक्ष्मीबाई जैसी साहसी, संस्कारी, आत्मसम्मानी और राष्ट्रनिर्माता बनने के लिए जन्मी हैं।
रवि शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, ममता, त्याग और सम्मान का प्रतीक माना गया है। हमारी सभ्यता ने सदैव महिलाओं को पूजनीय स्थान दिया है, इसलिए आज की बेटियों का भी यह दायित्व है कि वे अपने व्यक्तित्व को ऐसा बनाएं जिससे समाज उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया, टीवी सीरियलों, फिल्मों और कुछ मंचों पर जिस प्रकार महिलाओं को केवल बाहरी प्रदर्शन तक सीमित करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, उस पर गंभीर चिंतन आवश्यक है। बेटियों को स्वयं अपने स्वाभिमान, गरिमा और व्यक्तित्व की रक्षा करनी होगी।
उन्होंने कहा कि नारी का वास्तविक सौंदर्य उसके संस्कार, आत्मविश्वास, ज्ञान और साहस में होता है। यदि बेटियां अपने भीतर आत्मरक्षा, शिक्षा, चरित्र और आत्मसम्मान का प्रकाश जलाएंगी, तो समाज की अनेक बुराइयां स्वतः समाप्त हो सकती हैं। उन्होंने सभी माताओं, बहनों और बेटियों से आग्रह किया कि वे स्वयं भी मर्यादित जीवनशैली अपनाएं और समाज में बढ़ती अश्लीलता एवं अभद्रता का खुलकर विरोध करें।
रवि शास्त्री ने विशेष रूप से कहा कि आज समय की मांग है कि बेटियां केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि जूडो-कराटे, योग, प्राणायाम और आत्मरक्षा की कलाओं में भी दक्ष बनें। उन्होंने बताया कि आर्य समाज द्वारा आयोजित संस्कार शिविरों का उद्देश्य केवल धार्मिक शिक्षा देना नहीं, बल्कि बेटियों को मानसिक, शारीरिक और नैतिक रूप से इतना सक्षम बनाना है कि वे जीवन के हर संघर्ष में निर्भीक होकर आगे बढ़ सकें। शिविर में योगाभ्यास, प्राणायाम, वैदिक संस्कार, चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति, आत्मरक्षा प्रशिक्षण तथा सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूकता जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब एक बेटी संस्कारित होती है तो केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरा समाज शिक्षित और सशक्त बनता है। इसलिए आवश्यक है कि अभिभावक अपनी बेटियों को ऐसे शिविरों में भेजें जहां वे भारतीय संस्कृति, अनुशासन और आत्मरक्षा का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।
इस जनसंपर्क अभियान के अंतर्गत देव सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल भडल, गोल्डन ऐज पब्लिक स्कूल निरपुड़ा, स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल गैडबरा तथा धनौरा क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में भी संपर्क किया गया। वहां छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों को संस्कार शिविर की उपयोगिता बताते हुए अधिकाधिक सहभागिता का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य रुकम पाल यादव, प्रबंधक राजीव राणा, सविता आर्या, प्रधानाचार्य सत्यव्रत राणा, प्रधानाचार्य मनोज कुमार, धर्मपाल त्यागी, कपिल आर्य सहित अनेक गणमान्य शिक्षाविद एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि बेटियों का सशक्तिकरण केवल नारों से नहीं, बल्कि संस्कार, शिक्षा, सुरक्षा और आत्मबल से संभव है।
संदेश स्पष्ट था — नारी केवल सम्मान की अधिकारी नहीं, बल्कि स्वयं अपनी शक्ति की पहचान कर समाज को नई दिशा देने वाली वीरांगना बने।
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