बेतुल

बैतूल देश के लिए सबसे ख़ामोश लेकिन सबसे दर्दनाक दिन

जश्न नहीं, शहादत का स्मरण हो  इरशाद खान की देशभर के युवाओं से भावुक अपील

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल यह तारीख़ आते ही देश की आत्मा कांप उठती है।यह वह दिन है, जिसने भारत मां की गोद को उजाड़ दिया था।
यह वह दिन है, जब हंसते-खेलते घरों के चिराग़ तिरंगे में लिपटकर लौटे थे। इसी गहरे दर्द और राष्ट्रीय भावना को लेकर बैतूल प्रेस क्लब PCWJ के जिला अध्यक्ष इरशाद खान ने जिले ही नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं से एक गंभीर और ऐतिहासिक अपील की है।
“यह दिन गुलाब का नहीं, गर्व और ग़म का है”
इरशाद खान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
“14 फरवरी हमारे देश के लिए सबसे संवेदनशील तारीख़ बन चुकी है। इस दिन हमारे वीर जवानों ने अपनी जान देकर देश को बचाया। ऐसे दिन जश्न मनाना नहीं, बल्कि सिर झुकाकर श्रद्धांजलि देना हमारा फ़र्ज़ है।”
उन्होंने कहा कि देश आज भी उन शहीद जवानों की कुर्बानी की वजह से सुरक्षित है, जिनका सपना सिर्फ़ एक था — भारत सुरक्षित रहे, चाहे जान चली जाए।
युवाओं से सीधी अपील
खान ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा—
“आज का युवा देश का भविष्य है। अगर वह अपने शहीदों को याद नहीं करेगा, तो इतिहास भी उसे याद नहीं रखेगा। 14 फरवरी को आत्मचिंतन, श्रद्धांजलि और देशभक्ति के रूप में मनाया जाना चाहिए।”
एक सवाल, जो हर दिल को झकझोरता है
जब पूरा देश अपने वीरों को याद कर रहा हो,
तो क्या हम इस दिन को केवल एक ट्रेंड तक सीमित कर देंगे?
या फिर मोमबत्ती जलाकर, दो मिनट का मौन रखकर
अपने शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि देंगे?
देश की निगाहें युवाओं पर
इरशाद खान की यह अपील अब जिलेभर में ही नहीं,
बल्कि सोशल और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।
अब देखना यह है कि—
14 फरवरी को देश का युवा क्या चुनेगा?
जश्न… या शहादत को सलाम?
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