बहराइच

सरकारी धान खरीद में मिल मालिक, केन्द्र प्रभारी व अधिकारी मालामाल, मूल किसान बेहाल 

लेखपालों के फर्जी सत्यापन से बनतू किसानों के खातों में पैसे भेजकर हो रहा बन्दर बांट 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

बहराइच । सरकारी धान क्रय केंद्रों पर मिल मालिक,क्रय केंद्र प्रभारियों व, जिले के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से व लेखपालों के फर्जी सत्यापन से बनतू किसानों के नाम पर फर्जी धान खरीद लिखाकर उनके खातों में पैसे भेजकर बन्दर बांट किया जा रहा है। वहीं मूल किसान अपनी खून पसीने की उपज को औने पौने भाव पर बिचौलियों के हाथों बेचकर बेहाल है। सरकार के निर्देश पर जिले में पीसीएफ, पीसीयू, एफसीएस, यूपीएसएस समेत कई अन्य कंपनियों द्वारा सीधे मूल किसान से धान खरीदने हेतु जगह-जगह कांटे लगाए गए हैं। लेकिन धान की सरकारी खरीद का लाभ किसानों के बजाय मिल मालिक जिसे धान कुटाई कर सरकार को चावल सप्लाई का काम दिया गया है, केन्द्र प्रभारी जिसे किसानों से धान खरीद कर क्रय धान मिल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है और अधिकारी जिन्हें इस पुरे कार्य के निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। सिर्फ इन्हें भी धान खरीद का पूरा लाभ मिल रहा है। सच तो ये है कि वास्तविकता में कोई धान खरीद की ही नहीं जा रही सब कागजों पर हो रहा है। आपको सारा मामला आसान भाषा में समझाते है धान खरीद के लिए सबसे पहले किसान रजिस्ट्रेशन होता है जो ज्यादातर फर्जी खतौनी लगाकर कराया जाता है फिर उस किसान के नाम से क्रय क्रेन्द्र प्रभारी द्वारा खरीद दिखाई जाती है उस खरीद को एक वाहन नम्बर जो विभाग द्वारा अनुबंधित है पर चालान काटा जाता है फिर उस वाहन नम्बर का जीपीएस कार या मोटरसाइकिल में डालकर उस मिल तक जाया जाता है जो धान कुटाई के लिए अनुबंधित है फिर मिल द्वारा क्रय धान की फर्जी रिसीविंग केन्द्र प्रभारी को दी जाती है। जिसके बाद उस किसान के खाते में धान के पैसे आते हैं जिसे केन्द्र प्रभारी द्वारा किसान से वापस लिए जाते हैं फिर उन पैसों में से अपना हिस्सा काटकर बाकी मिलर्स तक पहुंचाया जाता है मिलर्स उस पैसे से खुली मार्केट से सस्ते दामों में धान खरीदता है और उसकी कुटाई कर सरकार को चावल की आपूर्ति करता है और साथ में क्रय एजेंसी के प्रबंधक व जिले के जिम्मेदारों को भी उनका हिस्सा पहुंचाता है। क्योंकि खेल बहुत बड़ा है। सबसे बड़ी ध्यान देने वाली बात ये है कि इसमें न तो कोई धान की खरीद हुई न कोई लोडिंग अनलोडिंग हुई न कोई वाहन क्रय केंद्र से मिल तक गया पर सारा काम कागज पर हो गया और किसान के खाते में पैसे भी आ गये और आया बट भी गये। सरकारी खरीद का लक्ष्य भी पूरा हो गया सरकार भी खुश और साहब भी खुश।
बहराइच जिले में सरकारी धान खरीद में फर्जीवाड़े की नित नई परतें खुलती जा रही हैं। कहीं भूमिहीनों के नाम सैकड़ों कुंतल धान की खरीद हो रही है तो कहीं वल्दियत बदलकर फर्जी किसानों के नाम रकबा बढ़ाने के खेल में राजस्व कर्मी मशगूल हैं। क्रय केंद्रों पर जो गाड़ियां धान ढोने के लिए जीपीएस सिस्टम के साथ अनुबंधित हैं वे वास्तविकता में अपने व अन्य जिलों में भाड़े पर गिट्टी मौरंग आदि ढो रही हैं और यहां केंद्र प्रभारी उन गाड़ियों का जीपीएस अपनी कार व मोटरसाइकिल की डिक्की में रखकर मिलों में चालान कटवाने का कार्य बखूबी कर रहे हैं। और तो और दो वाहन मालिकों ने आइजीआरएस डालकर शिकायत भी की है कि हमारी गाड़ी गिट्टी मौरंग ढो रही है उसके वावजूद उसपर धान का चालान काटा जा रहा फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।सोंचनीय यह है कि जिन जिम्मेदारों को धान खरीद में पारदर्शिता बनाए रखने का जिम्मा सौंपा था वो खुद इसमें हिस्सेदार बने बैठे हैं और अपने हिस्से की मलाई काट रहे हैं। वे भी सारा खेल जानते हुए भी अंजान बने बैठे हैं। फर्जीवाड़े का एक नमूना फखरपुर के मूसेपट्टी पर देखने को मिला जहां एफसीएस क्रय केंद्र फखरपुर प्रथम व द्वितीय दोनों केंद्र मूसेपट्टी में मिले जहां केंद्र प्रभारी बलराम जायसवाल की मौजूदगी में बड़ी मात्रा में धान की पैकिंग हो रही थी। प्रभारी ने किसान सुनील कुमार का धान खरीदने की बात बताई जो वहीं काम कर रहा था। लेकिन विसवां निवासी सुनील ने कहा कि मेरे नाम जमीन नहीं है मेरे पिता के नाम जमीन है।
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