कर्बला की याद में हुई कदीम शब्बेदारी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
जायस अमेठी। कर्बला के चटियल और तपते मैदान में मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन समेत हक़ के बहत्तर मुजाहिद नहरे फुरात के किनारे तीन दिन के भूखे और प्यासे शहीद कर दिए गए थे । कर्बला का यह दर्दनाक वाक्या भले ही इराक़ में आज से लगभग 1400 साल पहले हुआ हो लेकिन दुनिया भर में रह रहे लोगों के दिलों में यह गम आज भी एक घाव की तरह ज़िंदा है ।
इमाम हुसैन की अपने नाना के दीन को बचाने के लिए दी गई शहादत के बाद शुरू होने वाली अजादारी की जड़े नसीराबाद कस्बे में बहुत गहरी हैं और बुर्जुगों ने जिक्र ए हुसैन की जो शमा सैकड़ों साल पहले यहां रोशन की थी उसकी चमक आज भी इस कस्बे में पूरी ताकत के साथ बाकी है ।
नसीराबाद में बुजुर्गों की सदियों पहले रौशन की गई अज़ादारी की उसी शमा की रोशनी के साए में आज नसीराबाद कस्बे की मशहूर मातमी अंजुमन ,, अंजुमन मोहम्मदीया के बैनर तले होने वाली कदीम शब्बेदारी का 41वा दौर कामयाबी के साथ मुकम्मल हुआ
शब्बेदारी रात्रि 11 बजे मजलिस से प्रारंभ हुई जिसमें मौलाना त्रिमाह हैदर साहब इमामे जुमा व जमात जायस ने अहलेबेत की जिंदगी पर अपनी बेहतरीन तकरीर पेश की उससे पहले दिलबर असकरी ने मजलिस में सोज पढ़ा ।
मजलिस के समाप्त होने पर बाहर से आई हुई सभी चारों मातमी अंजुमनों ने बारी बारी से अपने अपने बेहतरीन कलाम के साथ जोरदार मातम किया । शब्बेदारी में शामिल होने वाली अंजुमनों में , अंजुमन रौनकें अजा सिरसी मुरादाबाद , अंजुमन मोइनुल अजा कानपुर , अंजुमन सीरते हुसैनी अहले सुन्नत जगदीशपुर , और जायस की अंजुमन शामिल थी ।
पूरी रात नसीराबाद के 250 साल पुराने और ऐतिहासिक आले नबी के इमामबाड़े पर होने वाली शब्बेदारी सुबह 6 बजे तक चलती रही । शब्बेदारी में बड़ी संख्या में दूर दूर से पहुंचे लोग सम्मिलित हुए ।
कार्यक्रम का संचालन मुल्क के मशहूर शायर खादिम शब्बीर ने किया और कार्यक्रम की रूपरेखा हाशिम शब्बीर ने खूबसूरती के साथ अंजाम दिया ।
अंत में अंजुमन मोहम्मदिया हुसैनिया नसीराबाद के अध्यक्ष मास्टर शुनीद रज़ा और जनरल सेक्रेटरी आले तकी ने आए हुए सभी मेहमानों और अंजुमनों का शुक्रिया अदा किया ।
इस अवसर पर मसूद नकवी , अली इमाम , मीसम नक़वी, कमाल असगर , जूही , ज़ुहैर, आले हसन , हुसैन अख्तर , एजाज़ रिज़वी , निसार हैदर , आदि मौजूद थे ।



