सिंगरौली

आदिवासी कन्या आश्रम शाला लंघाडोल में मासूम बच्चियों से कराया जा रहा काम

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
 सिंगरौली। प्रदेश सरकार जहां आदिवासी बच्चों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर विभिन्न योजनाएं चला रही है, वहीं सिंगरौली जिले के जनजातीय कन्या आश्रम शाला लंघाडोल में शिक्षा विभाग की नीतियों और सरकार की मंशा को पलीता लगाया जा रहा है। आदिवासी कन्या छात्रावास में रह रही मासूम बच्चियों से पढ़ाई कराने की बजाय उनसे मजदूरों जैसे काम करवाए जा रहे हैं।
मामला बेहद शर्मनाक है। जिन नन्हीं बच्चियों के हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, जिनकी आँखों में सपने और चेहरे पर मुस्कान होनी चाहिए, उन बच्चियों के हाथों में फोड़ा, तगाड़ी और हाशिया थमा दिया गया है। बताया जा रहा है कि छात्रावास में रह रही ये सभी बच्चियां पहली से पाँचवीं कक्षा तक की छात्राएँ हैं। इतनी छोटी उम्र में जब उन्हें शिक्षा और संस्कार मिलना चाहिए, तब उनसे निर्माण और सफाई जैसे काम करवाया जाना प्रशासन और जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा मामला सीधा-सीधा मासूम बच्चियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। शिक्षा का अधिकार (RTE) और बाल संरक्षण कानूनों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि यदि जिला प्रशासन इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं करता है तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल
छात्रावास प्रबंधन की लापरवाही और गैरजिम्मेदारी का यह मामला शिक्षा विभाग की निगरानी पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। आखिरकार निरीक्षण करने वाले अधिकारी इस तरह की गड़बड़ियों को क्यों नहीं देख पा रहे हैं? यह स्पष्ट संकेत है कि या तो अधिकारी लापरवाह हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं।
प्रदेश सरकार की मंशा पर धब्बा
प्रदेश सरकार लगातार यह दावा करती है कि आदिवासी बच्चों की शिक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और उन्हें हर स्तर पर बेहतर सुविधा दी जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को खोखला साबित कर रही है। जब मासूम बच्चियों से पढ़ाई की जगह मजदूरी करवाई जाएगी तो उनके उज्ज्वल भविष्य की कल्पना कैसे की जा सकती है?
जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन से इस मामले की तत्काल जांच कर छात्रावास प्रबंधन पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से मासूम बच्चियों के जीवन से खिलवाड़ हो रहा है, उन्हें किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए।
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