बागपत

डॉ. करुणा (BHMS, MD) – गंभीर पीलिया मरीज को जीवन देने वाली समर्पित चिकित्सक

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
स्वास्थ्य जगत में कभी-कभी ऐसे डॉक्टर सामने आते हैं, जिनका काम न सिर्फ उनके पेशे को मुकाम देता है बल्कि समाज में आशा की नई किरण भी जगाता है। बाम गाँव में कार्यरत डॉ. करुणा (BHMS, MD) ऐसा ही एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी हैं।
बाम गाँव में वे 2020 से अपनी सेवाएँ दे रही हैं और सप्ताह में दो दिन बड़ौत CHC में भी मरीजों को देखती हैं। उनके इलाज से लाभान्वित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ही में उन्होंने गंभीर पीलिया (लीवर फेलियर के अंतिम चरण) के एक 18 वर्षीय युवक को ठीक कर नया जीवन दिया—जो चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
एक्सक्लूसिव इंटरव्यू — डॉ. करुणा
प्रश्न 1 – डॉक्टर मैम, 2020 से आपकी सेवा यात्रा कैसी रही?
डॉ. करुणा:
BHMS और MD के बाद मैंने 2020 में बाम गाँव में सेवा शुरू की। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना एक चुनौती थी, लेकिन मरीजों का विश्वास और टीम का साथ मिला तो रास्ता आसान होता गया। सप्ताह में दो दिन बड़ौत CHC में बैठकर मैं अधिक मरीजों को देख पाती हूँ।
प्रश्न 2 – हाल ही में आपने जिस लीवर मरीज को ठीक किया, उसके बारे में विस्तृत बताएं।
डॉ. करुणा:
18 वर्षीय युवक का मामला बेहद गंभीर था।
दिल्ली के बड़े अस्पतालों में महीनों इलाज हुआ, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। जब वह मेरे पास आया, उसकी हालत चिंताजनक (टोटल बिलीरुबिन लेवल 25) थी—
गहरा पीलापन(आंखों व त्वचा पर)
अत्यधिक कमजोरी
भूख न लगना
त्वचा में जलन व खुजली
वजन में तेजी से गिरावट
मैंने उसकी विस्तृत केस हिस्ट्री लेकर होम्योपैथिक पद्धति के अनुसार उपचार शुरू किया।
लगातार 3 महीने की मॉनिटरिंग और दवाओं के बाद आज वह पूरी तरह सामान्य जीवन जी रहा है।
उसके स्वस्थ होने ने न केवल परिवार को बल्कि मुझे भी नई ऊर्जा दी।
प्रश्न 3 – इतने कठिन केस को संभालना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
डॉ. करुणा:
लीवर से जुड़े गंभीर रोग हमेशा चुनौतीपूर्ण होते हैं। हमने—
नियमित LFT टेस्ट
कड़ाई से डाइट प्लान
दवाओं की सही डोज़
मानसिक व भावनात्मक काउंसलिंग
इन सभी का संयोजन किया।
जब कोई मरीज लगभग हार चुका हो और फिर स्वस्थ हो जाए—यह डॉक्टर के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।
प्रश्न 4 – आपके पास अन्य बीमारियों के मरीज भी बड़ी संख्या में आते हैं।
डॉ. करुणा:
हाँ, खासकर—
सोरायसिस
एक्जिमा
दाद-खाज
बाल झड़ना
नसों का दर्द
माइग्रेन
कमर व जोड़ दर्द
क्रोनिक बॉडी पेन
इन मरीजों में से सैकड़ों लोगों को मैंने आराम दिलाया है।
होम्योपैथी विशेष रूप से बीमारी की जड़ पर काम करती है, इसलिए परिणाम स्थायी रहते हैं।
प्रश्न 5 – आपकी सबसे बड़ी प्रेरणा क्या है?
डॉ. करुणा:
मेरे लिए डॉक्टरी एक सेवा है।
जब कोई मरीज महीनों दर्द झेलने के बाद मुस्कुराते हुए कहता है कि “मुझे राहत मिली” — वही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है।
प्रश्न 6 – ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने का अनुभव कैसा रहा?
डॉ. करुणा:
ग्रामीण लोग विश्वास करने वाले होते हैं, लेकिन उन्हें स्वास्थ्य जागरूकता की जरूरत है।
कई मरीज बीमारी को अंतिम स्टेज तक छुपाते रहते हैं, यह सबसे बड़ा नुकसान है।
मैं हमेशा सलाह देती हूँ—
समय पर इलाज
पूरी दवा
नियमित डाइट
लाइफस्टाइल में सुधार
अब ग्रामीण क्षेत्र में अच्छे बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
प्रश्न 7 – आपका आगे का लक्ष्य क्या है?
डॉ. करुणा:
मैं ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर—
लीवर रोग
त्वचा रोग
महिलाओं के स्वास्थ्य
बच्चों की इम्युनिटी
पर और गहराई से काम करना चाहती हूँ।
मेरा लक्ष्य है कि होम्योपैथी की वास्तविक शक्ति हर घर तक पहुँचे।
सरकार और सहयोगी स्टाफ के लिए डॉ. करुणा का विशेष धन्यवाद
इंटरव्यू के अंत में डॉ. करुणा ने कहा—
“मैं सरकार का विशेष धन्यवाद करना चाहती हूँ, जिन्होंने ग्रामीण स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी और हमें बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई।
साथ ही बाम गाँव व बड़ौत CHC के पूरे स्टाफ का भी आभार—उनके सहयोग के बिना किसी भी गंभीर मरीज को ठीक करना संभव नहीं होता।
टीमवर्क ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।”
डॉ. करुणा न सिर्फ एक डॉक्टर बल्कि ग्रामीण समाज के लिए उम्मीद और विश्वास का प्रतीक बन चुकी हैं।
गंभीर लीवर रोगी को जीवन देना और सैकड़ों मरीजों को दर्द व बीमारी से राहत दिलाना—उनकी चिकित्सा क्षमता व समर्पण का प्रमाण है।
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