मूंग की खेती के बारे में जानकारी दी

भरतपुर। रबी फसलों की कटाई शुरू हो चुकी है, अगले 15 दिनों में सरसों व आलू के खेत खाली हो जायेंगे। कृषि महाविद्यालय भुसावर के डीन डॉ उदय भान सिंह ने बताया कि किसान खाली खेत में ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई कर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं यानि कि वैज्ञानिक तरीके से मूंग की खेती की जाये तो 75 दिन में एक लाख रूपये प्रति हेक्टेयर शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है। मूंग की जड़ें वातावरण की नाइट्रोजन को जमीन में स्थिर करती हंै। इसलिए इसकी खेती से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। रबी फसल कटाई के बाद खाली खेत की पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से कर, दो जुताई कल्टीवेटर से करें तथा पाटा देवें। सरसों खेत में रोटावेटर से जुताई की जा सकती है। बीज के अच्छे अंकुरण के लिए बुवाई पूर्व पलेवा अवश्य करें। डॉ उदय भान सिंह ने बताया कि विराट, शिखा, पूसा बैसाखी,एच यू एम-12 आदि मूंग की उन्नत किस्में हैं। बुवाई पूर्व बीज को 2 ग्राम थायरम प्रति किलोग्राम की दर से उपचारित करें। राइजोरियम कल्चर से बीज को उपचारित करना लाभकारी है। इसके लिए 15 से 20 किग्रा बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के तुरंत बाद पेंडिमेथालिन 30 ईसी 3.3 लीटर 600 लीटर पानी के घोलकर एक हेक्टेयर में छिड़काव करें। खेत में उचित नमी बनाये रखें तथा विशेषज्ञ की सलाह से कीट एवं बीमारियों का नियंत्रण करें।



