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हादसों से सबक ले शासन प्रशासन, स्कूली वाहनों पर भी दिया जाए ध्यान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
भरतपुर। सरकारी स्कूलों के साथ-साथ कई प्राइवेट स्कूल भी दयनीय अवस्था में है तो वहीं स्कूलों में बच्चों को लाने व  ले जाने वाले अधिकांश वाहनों की स्थिति भी सही नहीं है ।
 अधिकांश निजी विद्यालयों में बच्चों को स्कूल ले जाने वाले ऑटो, कैब ,वैन या बसों की अगर जांच की जाए तो कई वाहन बिना परमिट के ही चल रहे है तो कई वाहन जर्जर अवस्था मे है । बिना फिटनेस के दौड़ते स्कूली वाहन बच्चों की जान को जोखिम में डाल रहे हैं । वहीं क्षमता से कई गुना बच्चो को अपने वाहनों में ठूंस ठूंस कर भरकर दौड़ते हुई दृश्य सुबह के समय देखने को मिल जाएंगे । जहां ऑटो मात्र तीन सवारियों के लिये अधिकृत होता है वहीं ऑटो में दस से 15 तक बच्चो को ले जाया जाता है। उस पर भी प्रत्येक बच्चे के बस्ते रखना अलग। ऐसे ही हाल कैब अथवा वैन के होते है । एक के ऊपर एक बच्चा बैठा दिया जाता है। बच्चा अपने आप को असहज महसूस करता है पर कुछ कह नहीं पाता। आमजन को ऐसे वाहन दौड़ते दिखाई देते है ,पर न जाने क्यों जिम्मेदार लोगों को यह दिखाई नहीं देते।  इसके अलावा अब तो भरतपुर में 18 साल से कम उम्र के बच्चे भी बाइक लेकर स्कूल पढ़ने जाते हैं । उन्हें न तो स्कूल के अध्यापक बाइक से आने के लिये मना करना अपनी जिम्मेदारी समझते है और न ही अभिभावक उन्हें बाइक से जाने के लिये रोकते हैं। बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने में जितना दोष शासन प्रशासन का है, उतना ही दोष अभिभावकों का भी है।
अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिये किराए पर लिये जाने वाले वाहन की तसल्ली से चैकिंग करें और क्षमता से ज्यादा बच्चों को वाहन में ले जाया जा रहा है तो उसमें अपने बच्चों को नहीं भेंजे।
 वहीं स्कूल प्रशासन एवं संबंधित विभाग भी ध्यान दें। साथ ही बाइकों पर स्कूल जाने वाले बच्चों पर भी स्कूल प्रबंधन ध्यान दें
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