ललितपुर
बिरसा मुंडा जयंती पर कचहरी परिसर में हुआ कार्यक्रम
वक्ताओं ने रखा जल, जंगल, जमीन के नायक का विचार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
ललितपुर। स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और आदिवासी समाज के गौरव, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर कचहरी परिसर में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान कई अधिवक्ता और वादकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और उनके आदर्शों को याद किया। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता हरदयाल सिंह लोधी ने कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, वह आदिवासी अस्मिता के प्रतीक थे। उन्होंने जल, जंगल, जमीन के अधिकार के लिए ब्रिटिश हुकूमत और सामंतवादी व्यवस्था के खिलाफ उलगुलान (महान विद्रोह) छेड़ा। उनका संघर्ष हमें सिखाता है कि अपने हक के लिए लडऩा और प्रकृति की रक्षा करना हमारा मौलिक कर्तव्य है। अधिवक्ता पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने बिरसा मुंडा के आंदोलनों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिरसा मुंडा का नारा था अबुआ दिसुम अबुआ राज यानी हमारा देश, हमारा राज। उन्होंने आदिवासियों को संगठित किया और उन्हें अंधविश्वास, शराबखोरी और शोषण से मुक्ति दिलाई। उनका आंदोलन हमें बताता है कि सच्चे स्वराज का मतलब सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक न्याय भी है। वरिष्ठ अधिवक्ता नेमी चंद्र जैन ने कानूनी और सामाजिक परिप्रेक्ष्य से उनके योगदान को बताया कि बिरसा मुंडा के जीवन से प्रेरणा लेकर हम अधिवक्ताओं का भी यह दायित्व है कि हम समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर आदिवासी और वंचित समुदायों को न्याय दिलाने के लिए हमेशा तत्पर रहें। उन्होंने जिस साहस के साथ अन्याय का सामना किया, वह आज भी कानून के हर विद्यार्थी और पेशेवर के लिए प्रेरणा का स्रोत है। अधिवक्ता जानकी प्रसाद बौद्ध ने शिक्षा और जागरूकता पर जोर दिया बिरसा मुंडा ने बहुत कम उम्र में ही समझ लिया था कि शोषण के खिलाफ लड़ाई में शिक्षा और जागरूकता सबसे बड़े हथियार हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे देश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर सुदूर क्षेत्रों के लोगों तक शिक्षा पहुंचे, ताकि वे अपने अधिकारों को जान सकें और अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें। वक्ताओं ने सामूहिक रूप से उपस्थित लोगों से भगवान बिरसा मुंडा के दिखाए गए मार्ग पर चलने और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उपस्थित रहने वालों में हरदयाल सिंह लोधी, महेंद्र कुमार पाराशर, कैलाश नारायण राजपूत, पुष्पेन्द्र सिंह चौहान, वरिष्ठ अधिवक्ता नेमी चंद्र जैन, शशिकांत लोधी, जानकी प्रसाद बौद्ध, देव सिंह राजपूत, अरुण सिंह राजपूत, रंजना राजपूत, अंगद राजपूत, शैलेन्द्र राजपूत, कृष्ण कुमार जैन आदि अधिवक्ता और वादकारी शामिल रहे।



