गाजियाबाद

पीवीसी कोटेड बिजली के तार जलाना ‘जहरीला अपराध’ 

अंकुर बिहार एन्क्लेव संत नगर में जहरीले धुएं से लोगों का जीना दुश्वा धातु निकालने के लालच में मौत का धुआं फैला रहे असामाजिक तत्व, सांस, दिल और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : संत नगर स्थित अंकुर बिहार एन्क्लेव में बिजली के पीवीसी कोटेड तारों को जलाकर उनमें से तांबा और अन्य धातु निकालने की अवैध गतिविधि ने पूरे इलाके को जहरीले धुएं की चपेट में ले लिया है। यह लापरवाही अब सीधे तौर पर लोगों की सेहत और जीवन के लिए खतरा बनती जा रही है। धुएं के गुबार से क्षेत्र में सांस लेना मुश्किल हो गया है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पीवीसी और प्लास्टिक कोटिंग वाले तारों को जलाने से निकलने वाला धुआं बेहद विषैला होता है। इसमें डाइऑक्सिन, फ्यूरान और अन्य जहरीले रसायन निकलते हैं, जो शरीर के लिए धीमे जहर की तरह काम करते हैं। इस धुएं के संपर्क में आने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, सिरदर्द, खांसी और अस्थमा जैसी समस्याएं हो रही हैं। बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
चिकित्सक विनीत तोमर का कहना है कि लंबे समय तक इस जहरीले धुएं में रहने से फेफड़ों और हृदय पर गंभीर असर पड़ता है। यह विषाक्त तत्व रक्त प्रवाह में मिलकर हृदय रोग, स्ट्रोक और दौरे का खतरा बढ़ाते हैं। इतना ही नहीं, लगातार संपर्क में रहने से कैंसर जैसी घातक बीमारी का खतरा भी कई गुना बढ़ सकता है।
विशेषज्ञ साफ चेतावनी दे रहे हैं कि आबादी के बीच प्लास्टिक और रबर इंसुलेशन वाले तारों को जलाना सीधे तौर पर स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। यह केवल अवैध ही नहीं बल्कि सामाजिक अपराध भी है। इससे वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ता है और पूरे इलाके की हवा जहरीली हो जाती है।
स्थानीय लोगों में इसको लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि कुछ लोगों के लालच और गैरकानूनी कमाई की वजह से हजारों लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। शाम ढलते ही उठने वाला काला धुआं पूरे क्षेत्र को गैस चैंबर में बदल देता है।
निवासियों ने प्रशासन और पुलिस से तत्काल सख्त कार्रवाई, दोषियों की गिरफ्तारी और इस खतरनाक गतिविधि पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या किसी बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।
स्पष्ट है कि तार जलाने की यह हरकत सिर्फ पर्यावरण को नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी को भी जला रही है। प्रशासन की चुप्पी अब और भारी पड़ सकती है। पुलिस और प्रदूषण विभाग इस और से अनजान बने बैठे हैं
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