बागपत
समरस समाज से ही राष्ट्र की उन्नति संभव : डॉ. मनोज बिश्नोई
सामाजिक समरसता गतिविधि के तत्वावधान में संत शिरोमणि रविदास जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। जनपद बागपत के बड़ाबद गांव में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी की जयंती श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ भव्य रूप से मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल रविदास मंदिर परिसर में विधिवत हवन-यज्ञ के साथ हुई, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।
दोपहर के समय सामाजिक समरसता गतिविधि के सहयोग से सर्व समाज की ओर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा रविदास मंदिर से प्रारंभ होकर गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई पुनः मंदिर परिसर में संपन्न हुई। यात्रा के दौरान संत शिरोमणि रविदास जी के जयकारों से पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
शोभायात्रा में मातृशक्ति, युवाओं एवं बुजुर्गों सहित सर्व समाज की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गुरु रविदास जी की प्रतिमा पर पुष्पवर्षा कर उन्हें नमन किया। जगह-जगह ग्रामीणों द्वारा पुष्पवर्षा एवं स्वागत किया गया, जिससे आयोजन और भी भव्य बन गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामाजिक समरसता गतिविधि के विभाग संयोजक डॉ. मनोज बिश्नोई ने अपने संबोधन में कहा कि “समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है जब समाज समरस, संगठित और सशक्त बने। जाति-पाति और भेदभाव को त्याग कर यदि हम एकजुट होकर आगे बढ़ें, तो राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती।”
उन्होंने संत शिरोमणि रविदास जी के विचारों को आज भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि उनका जीवन समाज में समानता, करुणा और भाईचारे का संदेश देता है। डॉ. बिश्नोई ने युवाओं से सनातन संस्कृति की मशाल को आगे बढ़ाने, सामाजिक समरसता को जीवन में अपनाने तथा स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का भी आह्वान किया।
कार्यक्रम में विपिन कुमार (सह जिला संयोजक, सामाजिक समरसता गतिविधि), सत सिंह, नवीन, प्रधान अमित चिकारा, केशव, सुंदर, अमित, प्रदीप, राकेश, संजय, अमरेश, देवी, सुमन, राजकुमारी सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं ग्रामवासियों का विशेष सहयोग रहा।
पूरे आयोजन के दौरान गांव में सौहार्द, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सामाजिक समरसता ही सशक्त राष्ट्र की नींव है।



