खैरथल
आंधी में उड़ी स्कूल की टपरी,बच्चे खुले में पढ़ने को मजबूर
सत्ता और सिस्टम की संवेदनहीनता की बड़ी तस्वीर

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
खैरथल : जहां सरकार शिक्षा और स्वास्थ के क्षेत्र में विकास बड़े बड़े दावे करती है बडे बड़े विज्ञापन प्रचार से विकास के दावे और सिस्टम की समीक्षा बैठकों के निर्देश के पिछे एक सच ऐसा भी सामने आया । खैरथल -तिजारा जिले के तिजारा नगरपालिका क्षेत्र के रूँध गाँव से सामने आई तस्वीर न केवल झकझोरने वाली है, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता पर गहरा प्रश्नचिन्ह भी लगाती है।
आज खैरथल-तिजारा जिला कांग्रेस के जिला अध्यक्ष बलराम यादव ने रूँध गाँव का दौरा कर वहाँ के सरकारी स्कूल की वास्तविक स्थिति से रूबरूह हुए। गाँववासियों से संवाद के दौरान जो सच्चाई सामने आई, वह अत्यंत पीड़ादायक और चिंताजनक है।
गाँव का सरकारी स्कूल, जो पहले से ही एक जर्जर झोपड़ी में संचालित हो रहा था, हाल ही में आई तेज़ आँधी में पूरी तरह उड़ गया। अब हालात यह हैं कि छोटे-छोटे मासूम बच्चे खुले आसमान के नीचे, धूप-धूल और असुरक्षित वातावरण में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील समाज के लिए शर्मसार करने वाला है।
सरकार जहाँ एक ओर “हर घर शिक्षा” और स्मार्ट स्कूल जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। प्रशासन की नाक के नीचे इस प्रकार की स्थिति का बने रहना, न केवल लापरवाही बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है।
बलराम यादव ने सरकार ओर प्रशासन पर सवाल उठाते हुए तत्काल प्रभाव से इस मामले में ठोस कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित भवन, मूलभूत सुविधाएँ और सम्मानजनक शिक्षा का अधिकार मिलना ही चाहिए—यह कोई विकल्प नहीं, बल्कि उनकी बुनियादी आवश्यकता है। यह घटना एक कड़वा सच उजागर करती है कि आज भी कई गाँवों में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है और बच्चे अपने अधिकारों से वंचित हैं। अब समय आ गया है कि प्रशासन केवल कागजी दावों से आगे बढ़कर धरातल पर ठोस कदम उठाए, ताकि हर बच्चे को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा मिल सके, अन्यथा जिला कांग्रेस कलेक्टर और सरकार के मंत्रियों का गहराव करेगी इस अवसर पर उप प्रधान दयाराम चावड़ा, म मुन्नी गुजर, संजय चावड़ा सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

