बागपत
भगवाधारी पर अंधा विश्वास नहीं, पहले पहचान ज़रूरी
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
बागपत। आज के दौर में आस्था और विश्वास इंसान की सबसे बड़ी ताकत माने जाते हैं, लेकिन यही विश्वास कई बार उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बन जाता है। विशेष रूप से जब बात धर्म और साधु-संतों की आती है, तो आम लोग बिना जांच-पड़ताल किए ही सामने वाले को पूजनीय मान लेते हैं। यही अंधविश्वास कई बार लोगों को धोखाधड़ी, शोषण और अपराध का शिकार बना देता है।
भगवा वस्त्र – पहचान या आड़?
भारतीय संस्कृति में भगवा वस्त्र त्याग, तपस्या और सेवा का प्रतीक रहा है। लेकिन आज कुछ लोग इसी पवित्र रंग को अपनी ढाल बनाकर समाज को गुमराह कर रहे हैं।
कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ तथाकथित “बाबा” या “साधु” बनकर लोग न केवल पैसे ठगते हैं, बल्कि महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और यौन शोषण जैसी घिनौनी हरकतों में भी लिप्त पाए गए हैं।
भोली-भाली जनता सबसे आसान निशाना
गांवों और कस्बों में रहने वाले लोग, खासकर महिलाएं और बुजुर्ग, जल्दी भरोसा कर लेते हैं।
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घर में सुख-शांति के टोटके
इन सबके नाम पर ठग गिरोह सक्रिय हैं। लोग अपनी मेहनत की कमाई और इज्जत तक दांव पर लगा देते हैं।
अंधविश्वास बनाम जागरूकता
धर्म हमें सही रास्ता दिखाता है, लेकिन अंधभक्ति हमें गलत दिशा में ले जाती है।
जरूरी है कि हम किसी भी व्यक्ति पर सिर्फ उसके पहनावे के आधार पर विश्वास न करें।
ध्यान रखें:
किसी भी “बाबा” या “संत” की पहचान और पृष्ठभूमि जरूर जांचें
आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र देखने में संकोच न करें
किसी निजी स्थान पर अकेले मिलने से बचें
पैसे या गहने देने से पहले परिवार या विश्वसनीय व्यक्ति से सलाह लें
कानून भी सख्त, पर जागरूकता जरूरी
भारत में ऐसे फर्जी बाबाओं पर कई बार कार्रवाई हुई है, लेकिन हर बार नई शक्ल में ये फिर सामने आ जाते हैं। पुलिस और प्रशासन लगातार कार्रवाई करते हैं, लेकिन जब तक जनता खुद जागरूक नहीं होगी, तब तक इस समस्या पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल है।
महिलाओं की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण
अक्सर देखा गया है कि ऐसे ठग महिलाओं को निशाना बनाते हैं। उन्हें “गुप्त पूजा” या “विशेष अनुष्ठान” के नाम पर अकेले बुलाया जाता है।
यह बेहद खतरनाक स्थिति हो सकती है। परिवार को चाहिए कि वे ऐसी गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें।
समाज के लिए संदेश
धर्म और आस्था का सम्मान करना हमारी संस्कृति है, लेकिन आंख मूंदकर किसी पर भरोसा करना समझदारी नहीं है।
भगवा वस्त्र पहन लेना किसी को संत नहीं बना देता। असली संत वही है, जिसके आचरण में सच्चाई, सेवा और विनम्रता हो।
आज समय की मांग है कि हम अपनी आस्था के साथ-साथ अपनी समझदारी को भी मजबूत करें।
भगवाधारी पर भरोसा करने से पहले उनकी पहचान अवश्य जांचें, क्योंकि आपकी एक छोटी सी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।
याद रखें:
“विश्वास करें, लेकिन आंखें खोलकर।”



